सिंगापुर। केंद्र सरकार कम ब्याज दर वाले अंतरराष्ट्रीय बाजार से सस्ते लोन के जरिए फंड जुटा सकती है। इस रणनीति से ऊंचे ब्याज वाले घरेलू बाजार से बाहर निकलने में मदद मिलेगी और कर्ज की लागत कम बैठेगी। मुंबई स्थित ध्रुव एडवाइजर्स एलएलपी के सीईओ दिनेश कानबर ने मंगलवार को कहा, 'पहली बार भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में चल रही बहुत कम ब्याज दर पर गौर किया है। हम यह क्यों नहीं कर सकते (विदेशी बाजारों से उधार लेने का काम)।'

कानबर ने कहा कि अब तक सरकार पूरा का पूरा कर्ज घरेलू बाजार से उठाती रही है। यह पैसा 6 से 6.25 प्रतिशत ब्याज दर पर उठाया जाता रहा है। कानबर वित्त वर्ष 2019-20 के आम बजट पर आयोजित एक संगोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि विदेशी बाजारों से उधार लेने की योजना सरकार के विश्वास से भरे होने का संकेत देती है। कर्ज की लागत घटाने में होगी सहूलियत विदेशी बाजार से सस्ता लोन उठाने पर सरकार को बढ़ते निर्यात कारोबार और स्थिर मुद्रा विनिमय दर का फायदा मिलेगा।

कानबर ने कहा कि कुछ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तो एक प्रतिशत ब्याज दर पर ही कर्ज उपलब्ध है। इस दर पर उधार लेने से सरकार की कर्ज लागत काफी कम होगी। फंड प्रबंधकों की घर वापसी कानबर ने इस बात की तरफ भी ध्यान दिलाया कि भारतीय मूल के फंड प्रबंधक वापस भारत लौट रहे हैं, ताकि भारत में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरतें पूरी की जा सकें। सरकार ने ज्यादातर बेहतर ट्रैक रिकॉर्ड वाले फंड प्रबंधकों को वापस आने का स्वागत किया है। इनमें ज्यादातर भारतीय मूल के हैं।

टैक्स बढ़ने से झटका सरकार ने कहा है कि विदेशी फंडों पर टैक्स नहीं लगाया जाएगा। फिलहाल सिंगापुर में कोष प्रबंधकों पर 17 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया जाता है। हालांकि भारत सरकार के ताजा बजट में पांच करोड़ रुपए से अधिक कमाई करने वालों पर टैक्स की दर पहले के 35 प्रतिशत से बढ़ाकर 42.7 प्रतिशत करने से झटका लगा है। ट्रेड वॉर का फायदा उठाने की रणनीति बजट में किए गए अन्य उपायों में वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने वृहद् विनिर्माण क्षेत्र का प्रस्ताव किया है। यह प्रस्ताव चीन में काम कर रही अमेरिकी कंपनियों को चीन से बाहर स्थापित होने के लिए उपयुक्त होगा।

अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। कानबर ने अपने संबोधन में मुंबई स्थित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र (आईएफसी) में व्याप्त संभावनाओं का भी जिक्र किया। इस संबंध में उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तरफ से नियुक्त एक समिति के कामकाज के बारे में बताया। मुंबई का आईएफसी केंद्र गुजरात की गिफ्ट सिटी के पूरी तरह परिचालन में आने के साथ ही अस्तित्व में आ जाएगा।

Posted By: Arvind Dubey