बेंगलुरु। इन्फोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने कहा कि कंपनी विकास की रणनीति के अनुरूप काम कर रही है और वे सभी चीजें बेहतर तरीके से चलने के प्रति बेहद आश्वस्त हैं। कंपनी के आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं। देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस की 38वीं सालाना आमसभा को संबोधित करते हुए नीलेकणि ने कहा कि स्थायित्व अब कंपनी के लिए कोई मुद्दा नहीं है। वे इससे एक कदम आगे की सोच रहे हैं। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी) सलिल पारेख ने बेहद ठोस रणनीति बनाई है और कंपनी उस पर मजबूती से आगे बढ़ रही है।

दो साल पहले इन्फोसिस के संस्थापकों और तत्कालीन चेयरमैन में गहरे मतभेद के बीच नीलेकणि को कंपनी का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। इसी को लेकर एक शेयरधारक का सवाल था कि क्या कंपनी अब स्थायित्व की ओर लौट आई है। एक अन्य सवाल के जवाब में पारेख ने कहा कि कंपनी अभी पनाया और स्कावा को बिक्री के लिए नहीं रख रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी उन क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी कर रही है, जिन्हें भविष्य में कंपनी के विकास में मददगार के रूप में देखा जा रहा है।

एक गुमनाम शिकायतकर्ता ने पनाया के अधिग्रहण में कंपनी के पूर्व प्रबंधन धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए 2017 में शिकायत की थी। इसकी जांच के लिए एक समिति गठित की गई थी। समिति ने पूर्व प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी। इन्फोसिस के संस्थापक एनआर नारायणमूर्ति ने पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की थी। उसी साल अक्टूबर में नए चेयरमैन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने भी शिकायत को निराधार पाया। रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने के बारे में नीलेकणि ने कहा कि कई लोगों ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर ही संबंधित मामले में अपने बयान दिए थे। ऐसे में गोपनीय दस्तावेज को सार्वजनिक नहीं करने का फैसला ठीक था।

संस्थापकों और पूर्व प्रबंधन के बीच विवाद का कारण बन गई पनाया की बिक्री के लिए इन्फोसिस ने पिछले साल अप्रैल में योजना बनाई थी। इजरायल की इस कंपनी की बिक्री प्रक्रिया इस साल मार्च तक पूरी हो जानी थी, लेकिन कंपनी को कोई खरीदार नहीं मिला।

Posted By: Arvind Dubey