नई दिल्ली। कार उद्योग का संकट अब जिस स्तर पर पहुंच चुका है, वहां से उसके निकट भविष्य में उबरने की संभावना कम ही नजर आ रही है।

पिछले महीने के बिक्री आंकड़े बुधवार को सोसायटी ऑफ इंडियन आटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स की तरफ से जारी किए गए।

पिछले वर्ष जून के मुकाबले इस वर्ष जून में पैसेंजर कारों की बिक्री में 24.97 फीसद यानी करीब एक-चौथाई की गिरावट हुई है, तो दोपहिया वाहनों की बिक्री में 11.69 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है। वही वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में 12.27 फीसद की भारी गिरावट हुई है।

अगर समूचे ऑटोमोबाइल क्षेत्र की बात करें तो बिक्री 12.34 फीसद घट गई है। इसमें सबसे पहला कारण आर्थिक सुस्ती व हर क्षेत्र में उपभोग में कमी को बताया गया है। इसके अलावा GST, स्क्रैपेज नीति की घोषणा नहीं होना, लोन सुविधा में कमी, बीमा का महंगा होना व इंधन की कीमतों में अनिश्चितता को बताया गया है।

पिछले दो वर्षों से लगातार नए सुरक्षा मानकों के लागू होने को भी ऑटोमोबाइल उद्योग की समस्या के पीछे एक वजह बताया गया है क्योंकि इससे लागत बढ़ती जा रही है। पिछले व इस वर्ष सीट बेल्ट, रिवर्स पार्किंग सेंसर, स्पीड लिमिट रिमाइंडर, एयर बैग, एबीएस, फुल फ्रंट इंपैक्ट जैसे नए नियम लागू किए गए हैं।

अगले वर्ष अप्रैल से बीएस-6 का नियम लागू हो रहा है। ऐसे में बिक्री नहीं होने की वजह से कार कंपनियों के पास पुराने स्टाक बढ़ते जा रहे हैं। माना जा रहा है कि देश की सभी कार कंपनियों के पास 30 हजार करोड़ रुपये का ऐसा स्टाक है जिसकी बिक्री नहीं हो पा रही है।

बिक्री नहीं होने की वजह से बड़े शहरों में कारों के शो-रूम के लिए किराया निकालना मुश्किल हो रहा है। देश के कई शहरों से शो-रूम के बंद होने और उनमें नौकरियों में छंटनी होने की खबरें भी आ रही हैं।

Posted By: Navodit Saktawat