नई कार से ट्यूनिंग जमाना आसान नहीं है। अगर आप ठीक से कोशिश करेंगे तो यह लंबा साथ देगी। किसी भी पुरानी गाड़ी के मुकाबले नई कार को ज्यादा संभाल की जरुरत होती है। इन टिप्स को ध्यान में रखेंगे तो नई कार ... नई ही बनी रहेगी -

- हर कार का मिजाज अलग होता है। सुनी-सनाई बातों पर यकीन करना बंद कीजिए और कार मैन्युअल पूरा पढ़ लीजिए। टेक्नोलॉजी रोज बदल रही है, इसकी जानकारी आपको यहीं मिलेगी।

- पहली सर्विस होने तक तो हर नई कार को खास ख्याल की जरुरत होती है। शुरुआती दिनों में इंजन नया होता है तो यह भी बाकि पुर्जों से तारतम्य बैठा रहा होता है। यही हाल इलेक्ट्रॉनिक्स आयटम का भी होता है, जो बैट्री से आने वाले फ्लो से जूझ रहे होते हैं। इन हालात में कोई भी गड़बड़ होने पर सीधे कंपनी सर्विस स्टेशन से संपर्क करें। चीजोंं को टालना भारी पड़ सकता है।

- इंजन पर छोटी-छोटी राइड्स दबाव बनाती हैं। वो ठीक तरह से गर्म नहीं हो पाता और आप कार बंद कर देते हैं। नई कार में ऐसा बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए। इससे इंजन को ट्यून होने में खासी दिक्कत आएगी। कम दूर जाना हो तो नई कार का इस्तेमाल मत कीजिए। कम से सम तीन किमी की दूरी हो तो ही नई कार निकालिए।

- नई कार पर अचानक एक्सिलरेट करना, इंजन को खासा परेशान कर सकता है। कैसे भी हालात में आरपीएम मीटर पर लाल निशान ना छूने दें। इंजन ज्यादा फ्यूल खर्च करेगा ही, उसकी ट्यूनिंग भी खराब होगी।

-क्रूज कंट्रोल को नई कार में भूल ही जाना चाहिए। ऑटोमैटिक कार में खास फर्क नहीं पड़ेगा, मैन्युअल कारों में इससे बचें। क्रूज कंट्रोल में लंबे समय तक एक स्पीड मैंटेन की जाती है जो नए इंजन के लिए ठीक नहीं है। क्लच और इंजन को हर इसकी आदत हो जाने दीजिए और फिर क्रूज कंट्रोल मोड पर कार को लाइए।

- नई कार से टोइंग एक बुरा विचार है। नई कार से यह जोर आजमाइश महंगी पड़ सकती है। अभी उसके पुर्जे ढीले हैं और आप इसी से किसी लाचार कार को खींच रहे हैं। पहली सर्विस के बाद ही इस मैदान में उतरिये।

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