नई दिल्ली। अटकी रिहाइशा परियोजनाओं के घर खरीदारों ने आगामी बजट में 10,000 करोड़ रुपये के एक अलग फंड की मांग की है। बजट में इसका मकसद ऐसी परियोजनाओं में फ्लैट बुक कराने वाले पांच लाख से अधिक लोगों को राहत पहुंचाना है। चालू वित्त वर्ष के लिए आम बजट पांच जुलाई को पेश होना है।

मकान खरीदारों के संगठन 'फोरम फॉर पीपुल्स कलेक्टिव एफर्ट्स (FPCE) ने वित्त मंत्री को बजट के लिए दिए गए सुझाव में कहा है कि मकान खरीदारों को प्राथमिक सुरक्षित कर्जदाता माना जाना चाहिए। एफपीसीई को इससे पहले रेरा कानून बनवाने के लिए संघर्ष करने वाले प्लेटफॉर्म के तौर पर जाना जाता रहा है।

एफपीसीई के प्रेसिडेंट अभय उपाध्याय ने वित्त मंत्री को भेजे सुझाव में कहा है, 'आप जानती हैं कि पांच लाख से अधिक मकान खरीदारों की जीवनभर की कमाई विभिन्न रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में फंसी हुई है। इन प्रोजेक्ट्स में बिल्डरों ने प्राप्त धन का इस्तेमाल कहीं और कर लिया। इसकी वजह से इनका काम पूरा होने में अनिश्चितकालीन देरी हो रही है। बजट में यदि इस तरह के प्रोजेक्ट का काम पूरा करने के लिए अलग फंड रखा जाता है तो मकान खरीदारों को काफी राहत पहुंचेगी।"

उपाध्याय ने कहा कि रियल्टी सेक्टर के लिए रेरा कानून बनने के बावजूद कई प्रोजेक्ट्स पर काम देरी से चल रहा है और ये समय पर पूरे नहीं हो रहे हैं। अब समय आ गया है कि इस मसले पर गौर किया जाए। प्रस्तावित फंड बनाने का मकसद अगले पांच वर्ष्ाों के दौरान देश्ाभर में अटके प्रोजेक्ट का काम पूरा करना है। एफपीसीई ने कहा है कि सरकार के इस कदम से रियल एस्टेट सेक्टर में स्थिति साफ होगी।

Posted By: Arvind Dubey

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