गौरव गर्ग (हेड ऑफ रिसर्च, कैपिटलवाया ग्लोबल रिसर्च लिमिटेड - इन्वेस्टमेंट एडवाइजर)

Budget 2020 से आम आदमी और व्यापारियों को काफी उम्मीदें है, लेकिन एक ऐसा क्षेत्र जिसकी उम्मीदों को आवाज देने वाला वर्ग उतना मजबूत नहीं है वो है प्रकृति प्रेमी वर्ग। पिछले साल सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर देते हुए वायु प्रदुषण को लेकर तो कदम उठाए, लेकिन पानी को लेकर पिछले साल के बजट में कोई खास कदम नहीं उठायए गए। उसके विपरीत कई योजनाए जिन पर 2018-19 के बजट में चर्चा हुई थी, उस पर पिछले साल के बजट में कोई बात नहीं हुई। इस एक साल के अंतराल में, 2019 के आखिरी कुछ महीनों में सरकार ने जल संरक्षण के लिए कई योजनाए घोषित की है – जैसे की नल से जल योजना, अटल भूजल योजना आदि। पर्यावरणविद उम्मीद कर रहे हैं कि इस साल के बजट में सरकार इस ओर ध्यान देगी और बजट का एक बड़ा हिस्सा जल आपूर्ति और भारत के भूजल स्तर को उभारने के लिए जारी किया जाएगा।

अटल भूजल योजना सरकार की 6000 करोड़ रुपए की योजना है जिसका मुख्य उद्देश्य है भूजल के स्तर को सुधारना। आज भारत में सिंचाई के लिए 63 प्रतिशत जल जमीन से लिया जाता है। गैर कृषि उपयोग के लिए भी जो पानी इस्तेमाल होता है, उसमें से 80 प्रतिशत धरती से निकाला जाता है। यूनेस्को की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 तक भारत के 21 बड़े शहरों में पानी मिलना बंद हो जायेगा। इसके अलावा, भारत में गन्ने का उत्पादन बढ़ने से भी पानी की ज़रूरत में पिछले सालों में इजाफा हुआ है।

ऐसे में सरकार ने वर्ल्ड बैंक के साथ मिल कर अटल भूजल योजना की घोषणा की है, जिसके लिए 3000 करोड़ की राशि सरकार द्वारा लगायी जाएगी, वहीं 3000 करोड़ की राशि वर्ल्ड बैंक द्वारा दी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत सात राज्यों के 8350 ग्राम पंचायतों में भूजल के सुधार पर काम किया जायेगा। ये सात राज्य हैं - मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरयाणा, कर्नाटक और महाराष्ट्र। सरकार द्वारा लगायी जाने वाली राशि इन्ही राज्यों में ग्रांट के रूप में वितरित की जाएगी। अटल भूजल योजना सरकार की ऐसी पहली योजना है जो सीधे भूजल में मुद्दे पर बात करती है। इसके पहले की सभी योजनाएं अलग अलग माध्यम से भूजल संरक्षण की ओर कार्यरत थी - जैसे सिंचाई परियोजना, बारिश के पानी का संरक्षण आदि।

हम उम्मीद करते है कि इस साल सामाजिक और आर्थिक राशि के आवंटन में एक बड़ा हिस्सा पानी से जुडी योजनाओं को दिया जायेगा जिसमें अटल भूजल योजना को ख़ास महत्व दिया जा सकता है। इसके अलावा सरकार पाइप के माध्यम से घर-घर तक पानी पहुंचाने की मुहीम को भी इस साल के बजट में राशि आवंटित कर सकती है।

अवश्य ही इस प्रकार की घोषणाओं से मध्यप्रदेश को फायदा होगा और इंदौर जैसे महानगर की पानी की समस्या का निदान मिलने में सहायता होगी। इंदौर में फिलहाल शहरी क्षेत्र में पानी की आपूर्ति के लिए नर्मदा से पानी लाया जाता आ रहा है। बावजूद इसके, कई बोरिंग कानूनी और गैर कानूनी रूप से चलायी जाती है। उम्मीद है की बजट आने के पश्चात कुएं और बोरिंग के पानी पर निर्भरता को कम करने के साथ-साथ भूजल स्तर बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार और स्थानीय नगर पालिका कुछ ठोस कदम उठाएगी।

Posted By: Arvind Dubey