इंदौर। कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) के जरिए एक वित्त वर्ष में एक करोड़ रुपए से ज्यादा नकद भुगतान को दो प्रतिशत टीडीएस से मुक्त रखने के केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का ट्वीट इन दिनों विवादों की वजह बना हुआ है।

दरअसल, सोशल मीडिया पर सीतामण की घोषणा को सात दिन गुजर गए, लेकिन अब तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। इसके कारण किसानों के बीच वास्तविक स्थिति को लेकर भ्रम बना हुआ है। देशभर के किसान, व्यापारी और बाजार समितियां इसे भ्रामक करार दे रही हैं, क्योंकि एपीएमसी कहीं भी प्रत्यक्ष रूप से किसी तरह का भुगतान नहीं करती है।

मंडियों में किसानों की फसल के एवज में भुगतान सीधे व्यापारियों या कमीशन एजेंट्स के जरिए होता है, न कि एपीएमसी के माध्यम से। यदि इसे मंडी में रजिस्टर्ड ट्रेडर और किसानों की लेनदेन पर लागू माना जाए तो ही इसकी सार्थकता होगी। इसका गलत इस्तेमाल रोकना बड़ी चुनौती साबित होगी। एपीएमसी से जुड़े कई व्यापारी मात्र 5-10 प्रतिशत कारोबार इसके जरिए करते हैं। बाकी कारोबार इस अधिनियम से बाहर किया जाता है। ऐसे में इसके गलत इस्तेमाल की भरपूर आशंका है।

एपीएमसी महज नियामक

मंडियों में आम तौर पर किसान माल लाते हैं और ट्रेडर उन्हें कमीशन एजेंट्स के जरिए भुगतान करते हैं, जहां मंडी शुल्क लगता है। एपीएमसी का काम केवल साफसुथरी कारोबारी व्यवस्था देना और किसानों के लिए उचित मूल्य पक्का करना है।

स्पष्टीकरण की मांग

कई राज्य सरकारों, मंडी समितियों और व्यापार संगठनों ने केंद्र से इस पर स्पष्टीकरण मांगा है। ट्रेडर्स-किसान भुगतान पर यह व्यवस्था लागू करने की मांग की है। यदि इस मामले में ट्रेडरों को छूट मिलती है तो सरकार को साफ करना चाहिए कि वह इसे कैसे नियमित करेगी। कैसे तय होगा कि कैश निकासी किसानों के लिए ही की जा रही है। यदि दो प्रतिशत टीडीएस बचाने के लिए बोगस कृषि व्यापार शुरू कर दिया तो एक सितंबर से लागू नियमों के तहत वित्त वर्ष में कुल नकद निकासी की एक करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम पर बैंक दो प्रतिशत टीडीएस काटेंगे।

अन्य खर्च भी शामिल हो

सकल मध्य प्रदेश अनाज दलहन-तिलहन व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल के अनुसारस सरकार यदि किसानी खर्च में छूट देती है तो यह अच्छा कदम होगा, लेकिन स्पष्ट होना चाहिए की यह कारोबारियों के लिए हो न कि केवल आढ़तियों के लिए। सरकार को मंडी कारोबारियों के अन्य खर्च में भी यह छूट देनी चाहिए, जिसमें मजदूरी, हम्माली और सभी तरह के भाड़े शामिल हैं।

अभी भुगतान बैंकों के जरिए

इंदौर अनाज दलहन-तिलहन व्यापारी संघ के अध्यक्ष संजय अग्रवाल कहते हैं, नई घोषणा को लेकर अध्यादेश न आने के चलते कारोबारी सभी भुगतान बैंक आरटीजीएस के जरिए कर रहे हैं। इस पर अध्यादेश के बाद ही नकद भुगतान किया जा सकेगा। किसानी माल की खरीदी पर यदि यह सुविधा दी जाती है तो यह स्वागतयोग्य कदम होगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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