नई दिल्ली। सरकार ने शुक्रवार कॉरपोरेट टैक्स में बड़ी कटौती की घोषणा की। हालांकि कंपनियां पिछले कई वर्षों से इसकी मांग कर रही थीं, लेकिन आर्थिक कमजोरी के मौजूदा दौर में सरकार को लगा कि अब इस फैसले का वक्त आ गया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि घरेलू कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर की नई कंपनियों के लिए टैक्स की दर 25 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी कर दी गई है। इस फैसले से सरकारी खजाने को सालाना 1.45 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होगा।

मौजूदा कंपनियों के लिए

  • फिलहाल सरचार्ज और सेस के साथ कुल प्रभावी कॉरपोरेट टैक्सः 34.94 प्रतिशत
  • कटौती के बाद कुल प्रभावी टैक्सः 25.17 प्रतिशत
  • कुल टैक्स राहतः 9.77 प्रतिशत

विशेष व्यवस्था

जो कंपनियां कई तरह की रियायतें और टैक्स छूट का लाभ लेती हैं और नई टैक्स ढांचे का हिस्सा नहीं बनना चाहती हैं, उन्हें ऐसा करने की अनुमति होगी। लेकिन, एक बार नया कर ढांचा अपना लेने के बाद वे इससे बाहर नहीं हो सकतीं।

अगले महीने से अस्तित्व में आने वाली और 31, मार्च 2023 से उत्पादन शुरू करने वाली कंपनियों के लिए

  • फिलहाल सरचार्ज और सेस के साथ कुल प्रभावी कॉरपोरेट टैक्सः 29.12 प्रतिशत
  • कटौती के बाद कुल प्रभावी टैक्सः 17.07 प्रतिशत
  • कुल टैक्स राहतः 12.05 प्रतिशत
  • ऐसी कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक टैक्स (एमएटी) भी नहीं चुकाना होगा

मैट में भी कटौती

  • 18.5 प्रति से घटाकर 15 प्रतिशत किया गया
  • सेस और सरचार्ज के साथ कुल टैक्स 21-22 प्रतिशत
  • टैक्स की नई प्रभावी दर घटकर 17 प्रतिशत रह जाएगी

बायबैक पर भी छूट

जिन कंपनियों ने 5 जुलाई से पहले ही शेयर बायबैक का ऐलान कर रखा है, उन्हें 20 प्रतिशत बायबैक टैक्स नहीं देना होगा।

कंपनियों को कितना फायदा?

देश की टॉप 50 कंपनियों ने वित्त वर्ष 2018-19 में 1.65 लाख करोड़ रुपए टैक्स चुकाया था। यदि उनकी आय और मुनाफा स्थिर रहता है तो टैक्स में कटौती की बदौलत वित्त वर्ष 2019-20 में उन्हें 46 करोड़ रुपए कम टैक्स चुकाने की जरूरत होगी।

सरकार की माली हालत पर असर

मौजूदा वित्त वर्ष के लिए सरकार को रिजर्व बैंक की तरफ से 1.25 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त रकम हासिल हुई है। कॉरपोरेट टैक्स घटाने के चलते राजस्व में 1.45 लाख करोड़ रुपए की कमी आएगी। इस हिसाब से कुल बोझ करीब 20 हजार करोड़ रुपए रह जाएगा।