नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने फार्मा कंपनी रैनबैक्सी के पूर्व मालिक मालविंदर और शिविंदर सिंह को आदेश का उल्लंघन करने पर अवमानना का दोषी माना है। कोर्ट ने उनसे कहा था कि वे फोर्टिस हेल्थकेयर लि. में अपने शेयर ना बेचें, लेकिन उन्होंने वह बेच दिए। अवमानना की सजा सुप्रीम कोर्ट ने अभी तय नहीं की है। शीर्ष कोर्ट ने सिंह बंधुओं से पहले पूछा था कि उनके पास सिंगापुर की ऑर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल द्वारा जापानी दवा कंपनी दाइची सैंक्यो को 3500 करोड़ रुपए चुकाने के आदेश का पालन करने की क्या योजना है? प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोईव जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने सिंह बंधुओं को शुक्रवार को कोर्ट की अवमानना को दोषी माना। पीठ ने कहा कि पहले उन्हें आदेश दिया गया था कि वे फोर्टिस समूह में नियंत्रण के अधिकार वाली हिस्सेदारी को मलेशियाई कंपनी आईएचएच हेल्थकेयर को ना बेचें। कोर्ट ने हिस्सेदारी बेचने पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिंह बंधुओं की अवमानना मामले में सजा पर सुनवाई बाद में करेगी।

सैंक्यो ने लगाया था दावा

ज्ञात हो कि जापानी कंपनी सैंक्यो दाइची ने रैनबैक्सी के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी। सैंक्यों ने याचिका में कोर्ट से कहा था कि सिंह बंधुओं ने फोर्टिस में नियंत्रणात्मक हिस्सेदारी मलेशियाई कंपनी के समूह को बेच दी है, इसलिए ऑर्बिट्रेशन आदेश का क्रियान्वयन खटाई में पड़ जाएगा।

दाइची ने 2008 में खरीदी थी रैनबैक्सी

जापान की दाइची ने 2008 में रैनबैक्सी खरीद ली थी। बाद में सैंक्यो ने सिंगापुर की ऑर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में दावा लगाया कि सिंह बंधुओं ने कंपनी में हिस्सेदारी बेचते वक्त यह जानकारी छिपाई कि अमेरिकी खाद्य व औषधि प्रशासन विभाग उसके खिलाफ जांच कर रहा है। इसी मामले में दाइची नेअमेरिकी न्याय विभाग के साथ कानून के उल्लंघन के आरोप में 50 करोड़ डॉलर का जुर्माना अदा करने का समझौता किया था। इसके बाद सैंक्यो ने 2015 में रैनबैक्सी को 22,679 करोड़ रुपए में सन फार्मास्युटिकल्स को बेच दिया था।

Posted By: Arvind Dubey

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