ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के लिए एक बुरी खबर है। खबर ये है कि, सरकार ने फिल्पकार्ट और अमेजन जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों को लेकर नए नियम जारी किए हैं। इन नियमों के तहत अब कोई भी कंपनी खास रियायत नहीं दे सकेगी। ऐसे में ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों को कैशबैक और भारी डिस्काउंट जैसी कोई सुविधा नहीं मिलेगी।

सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए सख्त नियम बनाए हैं। अब फ्लिपकार्ट और अमेजॉन जैसे ऑनलाइन मार्केट उन कंपनियों के प्रोडक्ट नहीं बेच पाएंगी, जिनमें इनकी हिस्सेदारी है। इतना ही नहीं सरकार ने ऑनलाइन बाजार का परिचालन करने वाली कंपनियों पर प्रोडक्ट की कीमत प्रभावित कर सकने वाले कॉन्ट्रैक्ट पर भी रोक लगा दी है। इसके जरिए ऑनलाइन बाजार किसी भी प्रोडक्ट को केवल अपने प्लेटफॉर्म पर बेचने का कॉन्ट्रैक्ट नहीं कर सकेंगे।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने अपनी संशोधित नीति में कहा कि, ऑनलाइन कंपनियों को अपने सभी वेंडरों को बिना भेदभाव किए समान सेवाएं एवं सुविधाएं देनी होंगी। मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, इस संशोधन का लक्ष्य घरेलू कंपनियों को ई-कंपनियों से बचाना है क्योंकि एफडीआई के जरिए ई-कंपनियों को फायदा हो रहा है।

स्नैपडील के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुनाल बहल ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने अपने सोशल अकाउंट पर लिखा है कि, 'मार्केटप्लेस ईमानदार एवं स्वतंत्र विक्रेताओं के लिए है जिनमें से अधिकांश एमएसएमई हैं। ये बदलाव सभी को बराबर मौके देंगे।' वहीं, एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''इस कदम से ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा कीमतों को प्रभावित करने पर पूरी तरह से लगाम लगेगी। नीति के अनुसार, कोई भी वेंडर अधिकतम 25 प्रतिशत उत्पादों को ही किसी एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस के जरिए बेच सकेंगे।

खुदरा कारोबारियों के संगठन कैट ने कहा कि, यदि इन नियमों को सख्ती से लागू कर दिया जाएगा तो कीमतों को प्रभावित करने और ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा दी जाने वाली भारी छूट इतिहास की चीजें हो जाएंगी। बता दें कि, इस नियम को 1 फरवरी, 2019 से लागू किया जाएगा।

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