नई दिल्ली। निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में एक अहम बैठक हुई है। सूत्रों के मुताबिक हो सकता है कि इसमें विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को सरचार्ज से राहत देने का फैसला हुआ हो।

FPI को राहत देने के अलावा प्राइवेट लिस्टेड कंपनियों को पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने का फैसला फिलहाल स्थगित रखा जा सकता है। अर्थव्यवस्था में मंदी के संकेत को लेकर बढ़ती चिंता के कारण PMO हरकत में आ गया है।

वित्त मंत्रालय, नीति आयोग और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद को अर्थव्यवस्था में मंदी और निवेशकों के बीच निराशा की वजहें पता लगाने का निर्देश दिया गया है। उन्हें मौजूदा हालात से निपटने के तरीके भी सुझाने के लिए कहा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द इन मसलों पर दूसरी बैठक ले सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि जब तक कोई ठोस रणनीति नहीं बनती तब तक निवेशकों की चिंताएं दूर करने के लिए कई मुद्दों पर सहमति बन गई है।

थमेगी शेयर बाजार में गिरावट!

सूत्रों ने बताया कि PMO में हुई बैठक में FPI को सरचार्ज से जल्द राहत देने पर विचार किए जाने पर सहमति बनी है। आम बजट में दो करोड़ और पांच करोड़ रुपए से ज्यादा कमाई पर सरचार्ज लगाने का एलान किया गया था। इस प्रावधान के दायरे में आने के बाद एफपीआई ने बड़े पैमाने पर पैसा निकालना शुरू कर दिया, जिसक कारण घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट आई। अब उम्मीद की जा रही है कि बाजार संभलेगा।

PMO की बैठक में फैसले

  • सरचार्ज से एफपीआई को राहत देने के विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
  • फाइनेंस एक्ट में बदलाव किए बगैर निकाले जाएंगे विदेशी निवेशकों को राहत के रास्ते।
  • वित्त मंत्रालय में भी एफपीआई को सरचार्ज से राहत देने के मुद्दे पर चर्चा

और कई बड़े फैसले संभव

सूत्रों के मुताबिक सरकार आगे और कई बड़े फैसले कर सकती है। इसमें लिस्टेड कंपनियों के लिए न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता बढ़ाने का एलान वापस लेना शामिल है। सरकार ने बजट में मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग 25 से बढ़ाकर 35 प्रतिशत करने का एलान किया था। इस एलान पर अमल के लिए बाजार नियामक सेबी को नोटिफिकेशन जारी करना था। अब सेबी की ओर से नोटिफिकेशन जारी करने की संभावना नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, नीति आयोग और सेबी के बीच इस मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई। इसके बाद न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता बढ़ाने का फैसला फिलहाल टालने पर सैद्घांतिक सहमति बन गई है। यह फैसला अमल में आने पर करीब 150 कंपनियों के प्रोमोटरों को हिस्सेदारी बेचनी पड़ती। कई कंपनियों के प्रोमोटरों ने इसका विरोध किया था।

विदेशी बॉन्ड अभी नहीं

सूत्रों के मुताबिक PMO की बैठक में विदेशी सॉवरेन बॉन्ड पर भी कुछ सहमतियां बनी हैं। मसलन विदेशी सॉवरेन बॉन्ड जल्द जारी नहीं किया जाएगा। इससे पहले इसको लेकर जोखिम की पर्याप्त समीक्षा की जाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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