नई दिल्ली। घरों और मंदिर ट्रस्टों के पास पड़े करीब 25 हजार टन सोने को अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा में लाने के लिए चार साल पहले लॉन्च की गई गोल्ड मोनेटाइज स्कीम का नया स्वरूप तैयार किया जा रहा है। अब तक इसे उस स्तर की कामयाब नहीं मिल पाई है, जिसकी उम्मीद की गई थी।

सरकार गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को और आकर्षक बनाने के मकसद से इसमें बदलाव करने जा रही है। इसके लिए सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत हुई है। इस बात पर लगभग सहमति बनती नजर आ रही है कि मंदिर ट्रस्ट जैसे बड़े धारकों को गोल्ड बॉन्ड और दूसरी फाइनेंशियल स्कीम्स में ज्यादा लाभ दिलाया जाए। दूसरी ओर घरेलू जमाकर्ताओं को आश्वस्त किया जाए कि सरकार उनके गहने को एक समय सीमा तक बिना गलाए ही अपने पास रखेगी और उस पर ब्याज भी देगी।

केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने पिछले दिनों उद्योग संगठन ऐसोचैम के साथ बातचीत में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में बलदाव के संकेत दिए हैं। कारण यह है कि इस स्कीम के तहत अब तक केवल 18.47 टन सोना जमा हुआ है, जो लक्ष्य से काफी कम है। सरकार इस स्कीम को बेहतर और आकर्षक बनाने के लिए स्टेकहोल्डर्स की राय ले रही है और इस मसले पर अगले महीने शीर्ष संगठनों की एक बार फिर बैठक हो सकती है।

दो तरह के नियमों की संभावना

घरेलू जमाकर्ताओं के लिए

जानकारों का कहना है कि इस बार मंदिर ट्रस्ट और घरेलू जमाकर्ताओं के लिए डिपॉजिट और रिटर्न के नियम अलग-अलग हो सकते हैं। घरेलू जमाकर्ताओं के गहने बिना तोड़े-गलाए सरकार अपने पास रखती है। गहनों की शुद्घता के हिसाब से जमाकर्ता को फौरन वैल्यू सर्टिफिकेट दे दिया जा सकता है और उसी के आधार पर ब्याज भी दिया जाएगा। एक समयसीमा के बाद ग्राहक चाहे तो अपने गहने वापस भी ले सकता है। ज्वैलरी से भावनात्मक लगाव के चलते अधिकांश लोग मौजूदा स्कीम में हिस्सा नहीं ले रहे हैं, क्योंकि वे अपना पुश्तैनी या पारंपरिक आभूषण खोना नहीं चाहते।

मंदिर ट्रस्टों के लिए

ट्रस्टों के लिए गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के नियम आसान और रिटर्न आकर्षक बनाए जा सकते हैं। ऐसी व्यवस्था की जा सकती है कि वे चाहें तो सोना रिजर्व बैंक के पास रखें, जिसके बदले आरबीआई बॉन्ड जारी करेगा और ब्याज की गारंटी देगा। मैच्योरिटी के बाद वे चाहें तो अतिरिक्त सोना भी ले सकते हैं।

फुल केवाईसी की जरूरत

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के एमडी (इंडिया) सोमसुंदरम पीआर के मुताबिक सोने को अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में लाने के लिए हमें सामाजिक और राजनीतिक विचार से ऊपर उठना होगा। इंडस्ट्री को भी ज्यादा पारदर्शिता दिखानी होगी। उन्होंने कहा, 'आज कोई एक यूनिट म्यूचुअल फंड खरीदे तो उसके लिए केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) अनिवार्य है, लेकिन दो लाख का सोना खरीदे तो हम केवाईसी पर शोर मचाने लगते हैं। इंडस्ट्री को गोल्ड कारोबार में फुल केवाईसी को सपोर्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोने के मोनेटाइजेशन को लेकर व्यापक जनजागरूकता की भी जरूरत पर है।