नई दिल्ली। महंगाई कम क्या हुई, लोगों के हाथ खुलने शुरू हो गए हैं। सस्ते होते पेट्रोल व डीजल, कम होती महंगाई की दर और आमदनी बढ़ने की वजह से भारतीयों के पास ज्यादा पैसे बचने के आसार हैं। इसका असर इनके खर्च पर पड़ेगा।

अगले वित्त वर्ष के दौरान घरेलू खर्च में दो फीसद की बढ़ोतरी होने की संभावना है। यही नहीं आम परिवारों में बैंक व वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेने की रफ्तार में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की तरफ से जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

क्रिसिल के मुताबिक, देश में महंगाई की बेहतर होती सूरतेहाल की वजह से 1.40 लाख करोड़ रुपये की बचत होगी। सिर्फ ईंधन पर ही लोगों के पास 30 हजार करोड़ रुपये की बचत होने वाली है। खाने-पीने की चीजें सस्ती होने से जनता 1.10 लाख करोड़ रुपये बचाएगी। बची हुई यह राशि लोग विभिन्न उत्पादों पर खर्च करेंगे, जो देश की अर्थव्यवस्था की गति को और तेज करेगा।

पिछले दो वित्त वर्षों के दौरान भारत में निजी खर्चे की रफ्तार 4.9 फीसद रही है। इसके पहले के पांच वर्षों में यह 8.4 फीसद रही थी। पिछले दो वर्षों के दौरान महंगाई की दर 10 फीसद के करीब रही थी और आर्थिक विकास दर की रफ्तार घटने से प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी भी कम हो गई है। क्रिसिल के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस वर्ष निजी खर्चे में 7.1 फीसद की वृद्धि होगी, जो अगले वर्ष बढ़कर 7.8 फीसद हो जाएगा।

ब्याज दरें घटने का सिलसिला शुरू

रिपोर्ट के मुताबिक ब्याज दरों में कमी का सिलसिला शुरू हो गया है। ब्याज दरें घटने से बैंकों से कर्ज लेना सस्ता होगा। खास तौर पर जन धन योजना के तहत जिन लोगों ने बैंक खाते खोल रखे हैं, उन्हें दूसरे चरण में बैंकों से कर्ज देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह भी खर्चे पर असर डालेगा। घरेलू (व्यक्तिगत) कर्ज के अनुपात को देखें तो भारत में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के मुकाबले सिर्फ 12 फीसद ही कर्ज है।

अमेरिका में यह आंकड़ा 80 फीसद से ज्यादा है। 31 मार्च, वर्ष 2014 तक की स्थिति के मुताबिक बैंकों व गैर बैंकिंग संस्थानों से 1.40 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया है। यह जीडीपी का महज 22 फीसद है। इसका एक बड़ा हिस्सा हाउसिंग लोन के तौर पर है। अगर इसे अलग हटा दिया जाए तो जीडीपी का सिर्फ आठ फीसद ही घरेलू कर्ज है। इसका मतलब है कि घरेलू कर्जे की रफ्तार सरकार चाहे तो काफी बढ़ा सकती है। यह भी खर्च को बढ़ावा देगा।

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