नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने इंडियाबुल्स (Indiabulls) से जुड़े फंड हेराफेरी मामले में शुक्रवार को केंद्र व रिजर्व बैंक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस कथित हेराफेरी की एसआईटी जांच की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लि. (आईबीएचएफएल) ने नियमों का उल्लंघन कर कई अनियमितताएं की हैं।

जानिए क्या है याचिका

दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व जस्टिस सी. हरि शंकर की पीठ ने केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक व इंडियाबुल्स से जवाब मांगा है। यह याचिका एनजीओ-सिटीजंस व्हिसलब्लोअर फोरम ने दायर की है। कोर्ट ने अगली सुनवाई 13 दिसंबर को तय की है। इस फोरम में दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एपी शाह, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल एल. रामदास, पूर्व आईएएस अधिकारी अरुणा रॉय व एक्टिविट्स वकील प्रशांत भूषण सदस्य हैं। एनजीओ ने इस फाइनेंस कंपनी द्वारा की गई कथित धांधली की एसआईटी से जांच की मांग की है।

कंपनी पर ये आरोप

एनजीओ का कहना है कि बीते कई वर्षों से आईबीएचएफएल ने विभिन्न सरकारी व निजी बैंकों से मोटे कर्ज लिए। इस तरह उसने जनता का पैसा और आईबीएचएफएल के अंशधारकों व निवेशकों का पैसा बड़े कार्पोरेट समूहों के स्वामित्व वाली कंपनियों को संदिग्ध कर्ज के रूप में देकर उसे दांव पर लगाया। यही पैसा उक्त समूह इंडियाबुल्स के प्रवर्तकों की कंपनी में निवेश कर रहे हैं, जिनसे उनकी निजी संपत्ति बढ़ रही है।

याचिका दुर्भावनापूर्णः इंडियाबुल्स

इंडियाबुल्स ने पहले इस याचिका का विरोध करते हुए इस दुर्भावनापूर्ण बताया था। उसने कहा था कि इससे उसके कारोबार व प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है। कंपनी ने आरोप लगाया कि याचिका के मुद्दे सोशल मीडिया में लीक कर निहीत स्वार्थी तत्व उसके शेयर मूल्यों में हलचल मचाना चाहते हैं। सरकार और रिजर्व बैंक की ओर से अभी प्रतिक्रिया नहीं आई है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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