रजनी टंडेल (म्यूचुअल फंड प्रमुख एवं टीपीडी, एलकेपी सिक्योरिटीज)

ऐसे समय में जब वैश्विक गहमा-गहमी और कमजोर निवेश रुझान घरेलू शेयर बाजार को नीचे की तरफ ले जा रहे हैं, म्यूचुअल फंड यानी साझा कोष छोटे निवेशकों की पहली पसंद के रूप में उभरा है। एक मजबूत निवेश पोर्टफोलियो बनाने के लिए बड़ी संख्या में रिटेल निवेशक सिस्टमेटिक निवेश प्लान (एसआईपी) और सिस्टमेटिक ट्रांसफर प्लान (एसटीपी) का रास्ता अख्तियार कर रहे हैं।

इस वर्ष 31 मार्च तक पिछले 10 वर्षों में भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) करीब पांच गुना बढ़कर 23.80 लाख करोड़ रुपए हो गई है। एसोसिएशन ऑफ म्यूच्युअल फंड (एंफी) का अंदाजा है कि जुलाई 2019 में अंत में एयूएम 24.53 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया होगा। ग्रोथ ट्रेंड भी म्यूचुअल फंड फोलियो में नेट वृद्वि दर्शाते हैं,जो एक नि￝ाित अवधि में स्थिर विकास का संकेतक है। इसका मतलब यह है कि लंबी अवधि में म्यूच्युअल फंड में निवेश से जोरदार रिटर्न मिलने की संभावना देखने वाले निवेशकों की संख्या बढ़ रही है।

लोकप्रियता की दो बड़ी वजहें

1. अस्थिरता को मात देने में मदद - ऐसे निवेशक जो ज्यादा जोखिम नहीं उठानाचाहते, उन्हें म्यूच्युअल फंड विविधीकरण का लाभ देता है। इसका मतलब है कि अनेक एसेट क्लास मसलन, बॉन्ड्‌स, सोना और कीमती धातुओं में फंड के वितरण से निवेशक को बाजार में संकट के समय में जोखिम कम रहता है। विविधीकृत म्यूच्युअल फंड निवेश व्यूहनीति से बाजार की अस्थिरता को मात देने में मदद मिलती है। यह निवेश के मूल्य को सुरक्षा देता है।

2. जोखिम बांटने की सुविधा - सर्वाधिक आक्रामक से लेकर सुरक्षित, हर एक एसेट कैटेगरी में जोखिम और रिटर्न की प्रवृत्ति अलग-अलग होती है। यहां लक्ष्य जोखिम कम करना और जितना संभव हो सके अधिकतम रिटर्न होना चाहिए। एसेट आवंटन में अधिक विविधता निवेश रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा होता है। म्यूचुअल फंड विभिन्न निवेश श्रेणी में जोखिम बांटने की सुविधा देता है। एसेट आवंटन के समय जरूरी है कि निवेशक अपनी जोखिम प्रोफाइल एवं निवेश लक्ष्यों को ध्यान में रखें। एक समान रूप से वितरित म्यूचुअल फंड एसेट आधार भी कम अवधि से मध्यम निवेश अवधि में नियमित आधार पर सुनि￝ाित रिटर्न की गारंटी है।

एसआईपीः अनिश्चितता को मात देने की तगड़ी रणनीति

कई छोटे निवेशकों का मानना है कि म्यूच्युअलफंड निवेश से बड़ा लाभ हुआ है, जब रुपए की लागत औसत है। जब कोई निवेशक एसआईपी के माध्यम से अलग-अलग म्यूचुअल फंडों में पैसा लगाता है, तब फंड प्रबंधक विभिन्न नेट असेट वैल्यू (एनएवी) पर यूनिट्‌स खरीदते हैं। बाजार की ग्रोथ के लिए एनएवी सीधे समानुपातिक है। उदाहरण के लिए, यदि बाजार तेजी पर है, तो एनएवी अधिक होगी, तब यूनिट कम खरीदे जाएंगे। लेकिन, जब बाजार में रूख मंदी का हो, तब एनएवी कम होगी और यूनिट्‌स की अधिक खरीदारी का मौका होगा।

लंबी अवधि के निवेश परिपेक्ष्य से देखें तो यह निवेश की औसत खरीद मूल्य कम करने में मदद करता है, जो रुपए की औसत लागत का प्रमुख घटक है। बाजार में जोखिम के समय छोटे निवेशकों की सुरक्षा कवच, एसआईपी के माध्यम से म्यूच्युअल फंड में निवेश करने से बाजार की अनि￝ािता कम करने में मदद मिलती है और यह लंबी अवधि के निवेश का लक्ष्य पाने में समर्थ बनाता है। म्यूच्युअल फंड निवेश निवेशकों में वित्तीय अनुशासन को आत्मसात करना और एक प्रणालीगत ढंग से निवेश करने की आदत डालना भी है।

कंपाउंडिंग का फायदा

म्यूचुअल फंड कंपाउंडिंग के मौलिक सिद्घांत पर काम करते हैं, जोलंबी अवधि में बड़ी पूंजी तैयार करने में मददगार साबित होते हैं। असल में कंपाउंडिग लंबी अवधि की रणनीति है और जो कई तरह के लाभ की पेशकश करता है। इसका असर मूल पर ब्याज आय और पुर्ननिवेश रिटर्न पर होता है। यह सुनि￝ाित करता है कि निवेशक की संपदा एक दीर्घाअवधि में तीव्र दर से बढ़ी है, ऐसा लाभ किसी अन्य अल्पावधि निवेशों में नहीं है।

निवेश के अन्य साधनों से तुलना करने पर म्यूचुअल फंड बेहतरीन आर्थिक पैमाना ऑफर करते हैं, लिक्विडिटी बढ़ाते हैं और इनमें बेहतरीन जोखिम प्रबंधन शामिल है। अनेक फंड श्रेणियों में रिकॉर्ड प्रवाह होने पर भी कहा जाता है कि भारत में म्यूचुअल फंड की व्यापकता निराशाजनक है। अखिल भारतीय स्तर पर म्यूचुअल फंड की व्यापकता नगण्य करीब पांच प्रतिशत है। जाहिर है, इस उद्योग में विस्तार की व्यापक संभावना है।

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की एयूएम

- 31 मार्च 2009: 4.17 लाख करोड़ रुपए

- 31 मार्च 2019: 23.80 लाख करोड़ रुपए

- 31 जुलाई 2019: 24.53 लाख करोड़(अनुमानित)

Posted By: Arvind Dubey