Sugar : ब्राजील में तीन माह बाद नई शकर की आवक को देखते हुए इसके भाव में विश्व स्तर पर आए सुधार का लाभ भारतीय निर्यातकों को मिलने के आसार है। इससे शकर निर्यात लक्ष्य मई तक पूरा होने की उम्मीद की जा रही है।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में शकर के भाव इस समय वर्ष 2017 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर है। कच्ची शकर का भाव 15 सेंट प्रति पौंड के ऊपर पहुंच गया है, जबकि सफेद शकर के भाव 456.60 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गए हैंं। विश्व बाजार में शकर की कीमतों में आए सुधार से अगले तीन महीनों तक निर्यात मांग अच्छी बनी रहने का अनुमान है। तीन महीने बाद ब्राजील में नई शकर का उत्पादन शुरू हो जाएगा।

दुनियाभर में इस समय भारत के पास ही शकर का बकाया स्टॉक है, जिससे भारतीय मिलों के लिए शकर का निर्यात करना आसान हो गया है। मगर, ब्राजील और आस्ट्रेलिया में शकर उत्पादन का नया सीजन शुरू होने के बाद वैश्विक बाजार में सप्लाई में इजाफा होने से भारत के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी। भारत सरकार ने चालू पेराई सीजन 2019-20 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए 60 लाख टन चीनी निर्यात का कोटा तय किया है तथा चीनी मिलों को केंद्र सरकार 10,448 रुपए प्रति टन की दर से सब्सिडी दे रही है।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में शकर के दाम में आई तेजी के बाद ब्राजील आगामी सीजन में एथेनॉल के बजाय शकर का उत्पादन ज्यादा कर सकता है, क्योंकि शकर का उत्पादन उसके लिए ज्यादा लाभकारी साबित हो सकता है। ब्राजील दो साल पहले तक दुनिया में शकर का सबसे बड़ा उत्पादक था, लेकिन शकर के भाव में गिरावट आने के बाद वह शकर के बजाय एथेनॉल का उत्पादन ज्यादा करने लगा। बीते दो साल से भारत दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक देश बन गया है। ब्राजील के पास इस समय निर्यात करने के लिए शकर नहीं है।

30 लाख टन शकर निर्यात

चालू पेराई सीजन में अभी तक करीब 30 लाख टन से ज्यादा शकर निर्यात के सौदे हो चुके हैं। नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज लिमिटेड के अनुसार भारत 60 लाख टन शकर निर्यात के लक्ष्य को हासिल कर लेगा क्योंकि इस समय भारत के पास ही शकर का बकाया स्टॉक ज्यादा है और निर्यात मांग लगातार बनी हुई है। चालू पेराई सीजन में 260 लाख टन उत्पादन का अनुमान है।

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार, देश में इस साल शकर का उत्पादन 260 लाख टन होने का अनुमान है। वहीं, पिछले साल का बचा हुआ स्टॉक करीब 145 लाख टन है। इस प्रकार कुल उपलब्धता 405 लाख टन की बैठेगी, जबकि चीनी की सालाना खपत करीब 260 लाख टन की होती है। ऐसे में चालू सीजन में देश से 60 लाख टन चीनी निर्यात होता है तो भी चालू पेराई सीजन के अंत में करीब 85 लाख टन चीनी का बकाया स्टॉक बचेगा।

Posted By: Navodit Saktawat