शेयर बाजार में अस्थिरता के समय एसआईपी में निवेश को लेकर आशंकित होना बेमतलब है। यकीन करना थोड़ा मुश्किल जरूर है, लेकिन वास्तव में यह निवेश का ऐसा तरीका है जो गिरते हुए बाजार में पैसा लगाते रहने वालों को मालामाल कर सकता है।

धीरेंद्र कुमार (सीईओ, वैल्यू रिसर्च)

इन दिनों सिस्टमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी में निवेश को लेकर दुष्प्रचार चल रहा है। मीडिया में लगातार ऐसे आलेख आ रहे हैं, जिनमें एसआईपी में निवेश पर सवाल उठाए जा रहे हैं। बावजूद इसके कि अगस्त में एसआईपी के जरिए निवेश बढ़कर 8,230 करोड़ डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। जाहिर हे, निवेशकों को चाहिए कि वे ऐसी बातों पर ध्यान न दें। ये भटकाने वाली बातें हैं। अभी इक्विटी की वैल्यू में ठहराव आया है। निवेश करने या न करने का सवाल तब उचित होता है, जब बाजार चढ़ावपर हो और तेजी से ऊपर जा रहा होता है। दरअसल इन दिनों बाजार में जो अस्थिरता है, वह निवेशकों को बड़ा मौका दे रहा है।

यकीन मानिए इस समय निवेश के मामले में जैसा माहौल है, उसमें एसआईपी मेरा पसंदीदा विषय बन गया है। लेकिन, इसके बारे में कुछ बातें महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें निवेशकों को ध्यान में रखना चाहिए। इस समय निवेश को लेकर, खासतौर पर एसआईपी में पैसा लगाने को लेकर काफी दुष्प्रचार चल रहा है। यदि निवेशक इन फिजूल बातों पर ध्यान देते हैं तो यह उनके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

आजकल एसआईपी को लेकर कई तरह के आलेख सामने आ रहे हैं। इनमें दावा किया जा रहा है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान कई फंड्‌स में किए गए एसआईपी निवेश से अच्छा रिटर्न नहीं मिला है। आपको कुछ ऐसे आलेख भी मिलेंगे, जिनमें एसआईपी में निवेश नहीं करने की सलाह दी जा रही है। अच्छी बात यह है कि यह सब होने के बावजूद इन आलेखों में कुल मिलाकर एसआईपी में निवेश रोकने के लिए नहीं कहा जा रहा है।

पिछले पांच वर्षों में

  • 586 इक्विटी म्यूचुअल फंडों में से
  • 549 का एसआईपी रिटर्न सकारात्मक रहा, इनमें से
  • 50 प्रतिशत फंडों ने 6.5 फीसदी से अधिक रिटर्न दिया, और
  • 25 प्रतिशत के लगभग फंडों का रिटर्न 7.5 फीसदी तक रहा

उठापटक के दौर में भी अच्छा रिटर्न

इस समय हम 586 इक्विटी म्यूचुअल फंडों पर लगातार नजर बनाएहुए हैं। पिछले पांच वर्षों में इनका ट्रैक रिकॉर्ड काफी अच्छा रहा है। इस दौरान इनमें से 549 फंडों के लिए एसआईपी रिटर्न सकारात्मक रहा है। दिलचस्प है कि एक तरफ इक्विटी निवेश में उठापटक का दौर है और पूरी मीडिया में हर रोज रिटर्न को लेकर रोना-धोना मचा रहता है। दूसरी तरफ, आधे फंड्‌स ने 6.5 प्रतिशत से अधिक रिटर्न दिया है और करीब एक चौथाई ने 7.5 प्रतिशत तक रिटर्न दिया है।