नई दिल्ली। थोक भाव के हिसाब से महंगाई दर जुलाई में लगातार तीसरे महीने घटकर महज 1.08 प्रतिशत रह गई, जो 25 महीनों का न्यूनतम स्तर है। जून में थोक भाव की महंगाई दर 2.02 प्रतिशत थी।

मुख्य रूप से खाने-पीने की चीजें, ईंधन और कारखानों में तैयार होने वाले सामान की कीमतें कम रहना महंगाई दर घटने की वजह रही। माह दर माह आधार पर जुलाई में खाने-पीने की चीजों की थोक महंगाई दर 5.04 प्रतिशत से घटकर 4.54 प्रतिशत रह गई। इस दौरान प्राइमरी आर्टिकल्स की थोक महंगाई जून के 6.72 प्रतिशत से घटकर 5.03 प्रतिशत रह गई।

हमेशा अच्छी नहीं होती कम महंगाई

वैसे महंगाई दर घटने से आम आदमी को राहत मिलती है। खर्चे कम होते हैं और बचत बढ़ जाती है। लेकिन, यदि यह एक सीमा से नीचे आ जाए तो अर्थव्यवस्था में मांग घटने का संकेत भी होता है। महंगाई दर कम होने का एक बड़ा कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें नीचे रहना है। खुदरा महंगाई दर में इसकी हिस्सेदारी 55 फीसदी होती है।

इसमें जरूरत से ज्यादा कमी आने का एक मतलब यह भी है कि किसानों की आय घट जाएगी। कम महंगाई दर का एक अर्थ यह भी होता है कि मोटे तौर पर वेतन वृद्घि कम होगी, जबकि लोन की ईएमआई नहीं घटेगी। ऐसे में मांग सुस्त पड़ जाएगी, जिसका विपरीत असर अर्थव्यवस्था और रोजगार पर होगा। वाहनों की बिक्री कम होना और उसके चलते हजारों नौकरियां जाना इसकी बानगी है।