मुंबई। वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही में आईटी सेक्टर की सबसे बड़ी घरेलू कंपनी टीसीएस का मुनाफा 1.8 प्रतिशत बढ़कर 8,042 करोड़ रुपए हो गया। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी ने 7,901 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया था।

वैसे तिमाही दर तिमाही आधार पर दूसरी तिमाही में टीसीएस का मुनाफाप्रतिशत फीसदी घटा है। पहली तिमाही में कंपनी को 8,153 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। बहरहाल, दूसरी तिमाही में टाटा ग्रुप की इस कंपनी को 38,977 करोड़ रुपए की आय हुई, जिसमें सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज की गई। टीसीएस ने शेयर धारकों को 5 रुपए प्रति शेयर अंतरिम लाभांश और 40 रुपए प्रति शेयर विशेष लाभांश देने का एलान किया है।

नतीजों के कुछ अन्य आंकड़े

- आपरेटिंग आय 4.20 प्रतिशत घटकर 9,361 करोड़ रुपए

- प्रति शेयर अर्निंग 20.66 से बढ़कर 21.43 प्रतिशत हुई

- कंपनी छोड़ने वाले कर्मचारी की संख्या 11.60 प्रतिशत रही

- दूसरी तिमाही में कुल 14,097 नए कर्मचारी जोड़े गए

- 30 सितंबर तक कर्मचारियों की कुल संख्या 4,50,738 रही

इंडसइंड बैंक का मुनाफा 52 प्रतिशत बढ़ा

मुंबई (एजेंसी)। मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में निजी क्षेत्र के इंडसइंड बैंक का मुनाफा 52.2 फीसदी बढ़कर 1,400.96 करोड़ रुपए हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में इस बैंक ने 920.34 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया था। हालांकि इस दौरान बैंक की एसेट क्वालिटी खराब हुई और एनपीए बढ़ा है। डूबे कर्ज के लिए बैंक की प्रोविजनिंग भी बढ़ी है। यही वजह रही कि बीएसई पर इंडसइंड बैंक का शेयर 80.55 रुपए यानी 6.15 प्रतिशत गिरावट के साथ 1,228.95 रुपए पर बंद हुआ।

व्यापार समझौता वार्ता में भारत का तोल-मोल बड़ी चुनौतीः डीबीएस

आसियान और क्षेत्र के छह अन्य देशों के बीच प्रस्तावित क्षेत्रीय वृहद् आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौते में भारत का तोल-मोल का नजरिया इस व्यापार वार्ता के नतीजे तक पहुंचने की राह में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरा है। एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

सिंगापुर के डीबीएस बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार व्यापार समझौतों में भागीदारी को लेकर भारत की चुप्पी कई कारणों पर आधारित है। आरसीईपी को लेकर देखें तो सभी भागीदार देशों के साथ भारत का व्यापार-घाटा (निर्यात की तुलना में आयात की अधिकता) ऊंचा बना हुआ है। इसके साथ ही पहले के मुक्त व्यापार समझौतों से भारत के व्यापार गणित में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ और उम्मीदों के विपरीत कई प्रतिकूल परिस्थितियां भी पैदा हो गई हैं।

भारत के लिए खुलेंगे मौकों के दरवाजे

रिपोर्ट में कहा गया कि आरसीईपी का भागीदार होने से चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन इससे भारत समेत अन्य प्रस्तावित भागीदार देशों के लिए विविध अवसर भी खुलेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, बदलाव के साथ अनुकूलित होने का पहला चरण मुश्किल होगा क्योंकि आयात पर लगने वाले कुछ शुल्कों को समाप्त करना होगा। डीबीएस ने कहा, 'भागीदारी नहीं करने से जिन अवसरों का नुकसान होगा, वे भी महत्वपूर्ण हैं। बहुपक्षीय व्यापार समझौते से भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला तथा बाजार में पहुंच के अवसरों से जुड़ने में मदद मिलेगी।'

आरसीईपी वार्ता में भागीदार देश

आरसीईपी व्यापार वार्ता में 10 आसियान देश ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यामां, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम और इनके छह मुक्त व्यापार भागीदार भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं।