नई दिल्ली। देश के आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ी खबर है कि विश्व बैंक ने भारत की विकास दर का अनुमान घटा दिया है। विश्व बैंक ने अपने ताजा अनुमान में कहा है कि 2019-20 के वित्त वर्ष में जीडीपी 5 प्रतिशत रह सकती है, हालांकि, आगे चलकर यह 5.8 प्रतिशत तक जा सकती है। यह अनुमान जताते हुए विश्व बैंक ने बुधवार को कहा कि भारत में नॉन बैंकिंक फाइनेंशियल कंपनियों के क्रेडिट में कमोजरी के कारण विकास दर कम हो सकती है। हालांकि, 31 मार्च के बाद वित्त वर्ष में यह 5.8 प्रतिशत जा सकती है।

सरकार ने भी घटा दिया है अनुमान

बता दें कि इससे पहले केंद्र सरकार की तरफ से अर्थव्यवस्था के लिए इस वर्ष जारी पहले अग्रिम अनुमान में समूची अर्थव्यवस्था की जो तस्वीर पेश की गई है वह कहीं से भी उम्मीद जगाने वाली नहीं है। चालू वित्त वर्ष के दौरान देश की आर्थिक विकास दर पांच फीसदी रहेगी। आरबीआइ समेत कई निजी संस्थान भी विकास दर इसी के आस पास रहने की बात कर चुके हैं।

अगर जीडीपी की विकास दर पांच फीसदी ही रहती है तो यह न सिर्फ पिछले आठ वर्षों की सबसे न्यूनतम विकास दर होगी बल्कि यह चौथा साल होगा जब अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट का रुख रहेगा। ये आंकड़े विपक्ष को सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाने का एक और मौका देंगे।

सीएसओ के फर्स्ट एडवांस एस्टीमेट के मुताबिक वित्त वर्ष 2019-20 में देश का जीडीपी (स्थिर मूल्यों पर) 147.79 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2018-19 में यह 140.78 लाख करोड़ रुपए था। इस तरह चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर पांच फीसदी रहेगी। पिछले साल यह 6.8 फीसदी थी। राजग सरकार जब सत्ता (2014-15) में आई थी तब आर्थिक विकास की रफ्तार 7.4 फीसदी थी जो इसके बाद के दो वर्षों में क्रमशः आठ और 8.2 फीसदी हो गई थी। उसके बाद यानी वर्ष 2017-18 में यह 7.2 फीसदी थी।

Posted By: Ajay Barve

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