भीम सिंह, इंदौर। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों की तरफ से हेक्सेन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण 225 सोयाबीन प्रोसेसिंग यूनिटें बंद होने के कगार पर हैं। इसमें इंदौर एवं पीथमपुर स्थित 15 यूनिट समेत मध्य प्रदेश की करीब 50 सोया प्रोसेसिंग प्लांट शामिल हैं। पिछले करीब दो हफ्तों से हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और इंडियन ऑयल सोयाबीन प्रोसेसिंग यूनिटों को हेक्सेन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं। एचपीसीएल और बीपीसीएल हेक्सेन की सबसे ज्यादा आपूर्ति करती हैं। सोयाबीन से तेल निकालने के लिए इस केमिकल की जरूरत पड़ती है। इसके बगैर सोया प्लांट नहीं चल सकते।

देश में सोयाबीन प्रोसेसिंग यूनिटों की शीर्ष प्रतिनिधि संस्था सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन (सोपा) के मुताबिक फिलहालस्टॉक के हेक्सेन से काम चल रहा है, लेकिन यदि जल्द पर्याप्त आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो प्लांट बंद हो जाएंगे। इसका पहला असर सोयाबीन किसानों पर पड़ेगा, उनकी उपज का कोई लिवाल नहीं रह जाएगा।

नवंबर-दिसंबर पीक सीजन

देशभर में सोयाबीन प्रोसेसिंग प्लांटों के लिए नवंबर-दिसंबर पीक सीजन होता है। सोयाबीन को प्रोसेस करके तेल, सोया केक और सोयामील बनाए जाते हैं। इन चीजों का निर्यात भी किया जाता है। लेकिन हेक्सेन की आपूर्ति नहीं हो पाने के कारण इसकी पूरी प्रक्रिया बाधित हो रही है।

कितनी हेक्सेन की जरूरत

- 3-5 लीटर प्रति टन प्रोसेसिंग, जो प्लांट की मशीनरी पर निर्भर करता है

- 5 हजार लीटर हेक्सेन की रोजाना हर प्लांट को जरूरत होती है औसतन

- 1 हजार टन सोयाबीन की रोजाना प्रोसेसिंग होती है हर प्लांट में मोटे तौर पर

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

सोपा ने केंद्र सरकार से गंभीर होती स्थिति पर गौर करने और जरूरी कदम उठाने की गुजारिश की है। एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक ने कहा, 'हमने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव को चिट्ठी लिखकर उनसे तत्काल हस्तक्षेप करके सोयाबीन प्रोसेसिंग प्लांट बंद होने से बचाने का अग्रह किया है।' पाठक ने बताया कि उन्होंने 28 अक्टूबर को एचपीसीएल के महाप्रबंधक को हेक्सेन की आपूर्ति बहाल करने को लेकर बात की थी। उन्होंने अगले 10 दिन में स्थिति सामान्य होने का आश्वासन दिया था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

एचपीसीएल ने जताई असमर्थता

सोपा ने अपने सदस्यों को सूचित कर दिया है कि एक प्लांट बंद होने की वजह से एचपीसीएल फिलहाल मांग के मुताबिक हेक्सेन की आपूर्ति करने में असमर्थता जताई है। बीपीसीएल भी नई परिस्थितियों में उत्पादन बढ़ाने से इनकार कर रही है। इंडियन ऑयल भी आपूर्ति नहीं बढ़ा पा रही है। पाठक ने कहा कि यदि हेक्सेन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई तो बड़े पैमाने पर सोयाबीन प्रोसेसिंग प्लांट बंद हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में किसानों से सोयाबीन की खरीद से लेकर सोया तेल और मील की सप्लाई तक, पूरी श्रृंखला प्रभावित होगी, जिसका असर पोल्ट्री इंडस्ट्री पर भी होगा।

आयात संभव नहीं

इंदौर और इसके आसपास के सोया प्लांटों ने बताया कि हेक्सेन का आयात संभव नहीं है। कारण यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में फूड ग्रेड हेक्सेन उपलब्ध नहीं है, वहां केवल इंडस्ट्री ग्रेड हेक्सेन मिल रहा है। कुछ देशों में फूड ग्रेड हेक्सेन का उत्पादन होता है, लेकिन इतनी मात्रा में नहीं कि वे निर्यात कर सकें। दरअसल अब तक कभी ऐसे हालात पैदा नहीं हुए थे, लिहाजा हेक्सेन आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कभी सोचा ही नहीं गया।

हेक्सेन का अन्य इस्तेमाल

सोयाबीन और कैनोला के बीज से खाद्य तेल निकालने के अलावा हेक्सेन का इस्तेमाल जूते एवं लेदर के अन्य प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाला ग्लू तैयार करने में होता है। इस केमिकल का इस्तेमाल अलग-अलग तरह की वस्तुओं की सफाई और टेक्सटाइल मैन्यूफैक्चरिंग में भी होता है।

बीपीसीएल सबसे बड़ी सप्लायर

- बीपीसीएल ने नवंबर, 2018 में केरल की कोच्चि रिफाइनरी में पांच हजार टन सालाना क्षमता के साथ 'फूड ग्रेड क्वालिटी हेक्सेन' का उत्पादन शुरू किया था। इसके बाद देश में जरूरत के मुताबिक इसकी आपूर्ति होने लगी थी।

- साल 2018 में ही बीपीसीएल ने संयुक्त रूप से हेक्सेन प्रोडक्ट्स का उत्पादन और इनका पेटेंट कराने के लिए अमेरिकी कंपनी जीटीसी के साथ एक करार किया था।

- उसी साल इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने घोषणा की थी कि वह वडोदरा स्थित कोयाली रिफाइनरी में कू्रड ऑयल प्रोसेसिंग प्लांट की क्षमता बढ़ाने के लिए साल 2022 तक करीब 245 अरब रुपये का निवेश करेगी, ताकि फूड ग्रेड हेक्सेन की आपूर्ति बढ़ाई जा सके।

Posted By: Sandeep Chourey

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