मुंबई। लंबी रस्साकशी और कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार बाबा रामदेव नियंत्रित पतंजलि आयुर्वेद ने रुचि सोया के अधिग्रहण की बाजी जीत ली। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने गुरुवार को रुचि सोया इंडस्ट्रीज लिमिटेड के लिए पतंजलि आयुर्वेद की 4,350 करोड़ रुपये की बोली को अनुमोदन दे दिया।

इस अनुमोदन के साथ ही यह तय हो गया है कि कर्जदाता बैंकों को तगड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा। रुचि सोया पर कर्जदाताओं का 9,345 करोड़ रुपये और अन्य लेनदारों का करीब 2,800 करोड़ रुपये बकाया है।

सौदे को अनुमोदन देने से पहले एनसीएलटी ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और सिंगापुर के कर्जदाता डीबीएस की याचिकाएं खारिज कर दीं। दोनों कर्जदाताओं ने पतंजलि आयुर्वेद की बोली को कम बताते हुए सौदे को चुनौती दी थी।

इनका कहना था कि इतनी कम बोली पर सौदे को अनुमोदन से उन्हें बहुत कम रकम मिलेगी। कंपनी के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) ने परिचालन कर्जदाताओं के 2,716.61 करोड़ रुपये के दावे भी स्वीकार कर लिए हैं। अभी यह नहीं बताया गया है कि इन कर्जदाताओं को कितनी रकम वापस मिलेगी।

लेकिन इतना तय है कि कर्जदाता बैंकों को लगभग 60 फीसद रकम से हाथ धोना पड़ेगा। NCLT ने यह भी कहा है कि यह अनुमोदन इस बात पर निर्भर करता है कि पहली अगस्त को सुनवाई से पहले बोली के हिस्से के तौर पर 600 करोड़ रुपये जमा कराने की जो शर्त है, उस रकम का मूल स्रोत क्या है।

इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने आरपी को पूरी समाधान प्रक्रिया के खर्च का भी हिसाब-किताब देने को कहा है। सौदे के बारे में पतंजलि आयुर्वेद के MD आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है।

इससे स्वदेशी आंदोलन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि रुचि सोया के प्रमुख ब्रांडों में न्यूट्रिला, महाकोश, सनरिच, रुचि स्टार और रुचि गोल्ड शामिल हैं।

Posted By: Navodit Saktawat