नई दिल्ली। आगामी बजट में आवश्यक वस्तु अधिनियम के दंडात्मक प्रावधानों को हटाया जा सकता है क्योंकि कई विशेषज्ञ इसे कृषि सुधार के एक बड़े बदलाव के रूप में देख रहे हैं, जो कृषि आय में वृद्धि कर सकता है। सरकार आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसीए) के दंडात्मक प्रावधानों को रद्द करने पर विचार कर रही है, जैसे निवारक निरोध, वाहनों की जब्ती और संपत्तियों की कुर्की, ताकि व्यापारी सीधे बड़ी मात्रा में किसानों से उपज खरीद सकें। इसके सीधे किसानों के हाथ में पैसा पहुंचेगा और किसानों की आय बढ़ेगी। यह जानकारी इस मामले से जुड़े जानकारों ने दी।

यह कानून कृषि अर्थव्यवस्था पर प्रतिबंध लगाता है। इसके तहत व्यापारी सीमित मात्रा में किसानों से अनाज खरीद सकते हैं और उसे स्टॉक के रूप में जमा कर सकते हैं। कानून में नामित कोई स्थायी भंडारण की सीमा या वस्तुएं नहीं हैं। मगर, सरकार जरूरत पड़ने पर कुछ वस्तुओं को इसमें शामिल कर सकती है या बाहर निकाल सकती है। इसकी वजह से व्यापारियों के सामने परेशानी खड़ी हो जाती है।

इस बदलाव के बारे में विचार किया जा रहा है और सरकार के कई मंत्रालय व कई राज्य इस प्रस्ताव के पक्ष में हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने हाल ही में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 को तर्कसंगत बनाने पर अन्य मंत्रालयों और राज्यों से जानकारी मांगी थी। इसका मकसद किसानों को उनकी उपज के लिए प्रतिस्पर्धी दरों को दिलाना और कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना है।

दिसंबर के मध्य में एक समिति ने यह भी माना कि ईसीए के वे दंडात्मक प्रावधान जो किसानों के हित में नहीं हैं, उन्हें खत्म कर देना चाहिए। मगर, यह संभावना है कि मौजूदा रेगुलेशन पीडीएस (सार्वजनिक वितरण सेवाओं) के जरिये आपूर्ति की जाने वाली खाद्य वस्तुओं पर प्रभावी रहेगा।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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