नई दिल्ली। उद्योग जगत वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी छमाही में यानी सितंबर से अगले साल मार्च तक अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद कर रहा है। कंपनियों का मानना है कि राजनीति और नीतिगत स्तर पर स्थिरता के चलते वित्त वर्ष के बाकी महीनों के दौरान कुछ सेक्टरों में निवेश की स्थिति सुधरेगी।

कंपनियों के मुताबिक रियल एस्टेट, स्मॉल अप्लायंसेंज और ब्रांडेड अपैरल सेक्टर में सकारात्मक रुझान का अनुमान है।

बाजार एवं निवेश से जुड़ी रिसर्च फर्म सीएलएसए इंडिया की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अर्थव्यवस्था में सुस्ती को लेकर कंपनियां चिंतित तो हैं, लेकिन दूसरी छमाही को लेकर उनका रुख सकारात्मक है। कंपनियों का मानना है कि दूसरी छमाही से निजी निवेश की स्थिति में बदलाव आने शुरू हो सकते हैं।

मौजूदा वित्त वर्ष की शुरुआत से अब तक शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों, खासतौर पर आईटी सेक्टर की कंपनियों में रोजगार के मौकों को लेकर सुधार की स्थिति देखने को मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक आईटी सेक्टर के अलावा इस वित्त वर्ष एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां) सेक्टर में भी नौकरियां पैदा हुई हैं।

100 लिस्टेड कंपनियों की सालाना रिपोर्ट का सार

सीएलएसए ने स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करीब 100 कंपनियों की सालाना रिपोर्ट का सार निकालकर यह रिपोर्ट तैयार की है। इन कंपनियों की वित्त वर्ष 2018-19 की सालाना रिपोर्ट मौजूदा आर्थिक हालात के मद्देनजर तैयार की गई है।

इसके मुताबिक कंपनियों का एक सकारात्मक रुख यह है कि ये देश में राजनीतिक स्थिरता को लेकर काफी उत्साहित हैं। खासतौर पर रियल एस्टेट, स्मॉल अप्लायंसेज और ब्रांडेड अपैरल सेक्टरों से जुड़ी कंपनियां भविष्य को लेकर उत्साहित हैं। हालांकि ऑटो और ग्लोबल कमोडिटीज से जुड़ी कंपनियां सशंकित हैं।

बड़ी उम्मीद इसलिए

- रिपोर्ट में जिन कंपनियों को शामिल किया है उनका मार्केट कैप 1.2 खरब डॉलर है

- यह देश की कुल लिस्टेड कंपनियों के बाजार पूंजीकरण का तकरीबन 65 प्रतिशत है

ढांचागत सुधारों का मिला लाभ

कई कंपनियों ने इस बात पर सहमति जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के पहले कार्यकाल में कई ढांचागत सुधार हुए। सीएलएसए का मानना है कि कुछ कॉरपोरेट और कई सेक्टरों को इसका फायदा भी हुआ। कुछ कंपनियों ने कंसोलिडेशन के जरिए इन सुधारों का लाभ लिया। ये ही सेक्टर अर्थव्यवस्था के भविष्य की स्थिति को लेकर सकारात्मक हैं। इनमें डिजिटल इकोनॉमी लिंक्ड कंपनियां और नॉन लेंडिंग फाइनेंशियल कंपनियां भी शामिल हैं।

पूंजी निवेश पर मिश्रित रुख

रिपोर्ट के मुताबिक पूंजी निवेश को लेकर कंपनियों का रुख मिश्रित रहा है। एलएंडटी के हवाले से कहा गया है कि वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी छमाही में निवेश के माहौल में सुधार की उम्मीद है। एलएंडटी का मानना है कि इस अवधि तक केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का कामकाज सुचारु रूप से चलने लगेगा।