नई दिल्ली। आर्थिक सुस्ती से बाहर निकलने के लिए केंद्र सरकार हर क्षेत्र को बूस्टर डोज देने की कोशिश में जुटी है। शुक्रवार को कॉरपोरेट टैक्स में बड़ी कटौती का ऐलान इसकी सबसे ताजा कड़ी है। लेकिन, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।

पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रणब सेन ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने के लिए पीएम-किसान योजना, मनरेगा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे केंद्र-संचालित कार्यक्रमों की राशि खर्च करने पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए।

यदि इन योजनाओं के लिए धनराशि अधिक आवंटन करने की जरूरत पड़े तो उससे भी नहीं हिचकना चाहिए। सेन के मुताबिक भले ही सरकार को राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को एक दो साल के लिए स्थगित करना पड़े, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की योजनाओं पर अधिकाधिक राशि खर्च करनी चाहिए।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (एनआईपीएफपी) में कंसल्टेंट और वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका पांडेय ने कहा, 'अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की किसी भी रणनीति का अहम हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बढ़ाना होना चाहिए। कंस्ट्रक्शन समेत उन क्षेत्रों पर जोर दिया जाना चाहिए, जिसमें श्रमिकों का अधिक इस्तेमाल होता है।'

बजट खर्च धीमा

सेन की बात इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जुलाई के दौरान गांव और किसान से संबंधित योजनाएं चलाने वाले मंत्रालयों की बजट राशि खर्च करने की रफ्तार धीमी रही है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय

चालू वित्त वर्ष का कुल बजट लगभग एक लाख बीस हजार करोड़ रुपए है। लेकिन, अप्रैल से जुलाई की अवधि में मंत्रालय ने लगभग 42 हजार रुपए ही खर्च किए हैं, जो बजटीय आवंटन का 35 प्रतिशत है। पिछले वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 49 प्रतिशत राशि खर्च की थी।

कृषि मंत्रालय

चालू वित्त वर्ष में अपने बजटीय आवंटन की 26 प्रतिशत राशि खर्च की है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 43 प्रतिशत थी। यही हाल मत्स्य और पशुपालन विभाग, जनजातीय कार्य और महिला एवं बाल विकास मंत्रालयों का भी है।

मांग बढ़ाने की जरूरत इसलिए

ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बढ़ाने की जरूरत इसलिए है, क्योंकि हाल में सीएसओ ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा है। सीएसओ के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर पांच प्रतिशत रही, जो पिछले छह वर्षों में सबसे कम है।

खर्च बढ़ाना इसलिए जरूरी

ग्रामीण इलाकों में सरकारी खर्च बढ़ाने के उपायों से लोगों की आमदनी बढ़ेगी। ग्रामीण इसका इस्तेमाल बाजार में करेंगे तो अर्थव्यवस्था को चलाते रहने में मदद मिलेगी।

एनआईपीएफपी के पांडेय ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खरीद कम होने की वजह से महंगाई कम हुई है। इसके कारण वहां अधिक नकदी की आपूर्ति की संभावनाएं हैं। ढांचागत क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं, लेकिन ऐसी ढांचागत सुविधाएं बनाने पर जोर देना चाहिए, जिनसे ज्यादा से ज्यादा रोजगार पैदा हो सके।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

जीतेगा भारत हारेगा कोरोना
जीतेगा भारत हारेगा कोरोना