नई दिल्ली। Equity Research Company Philip Capital (India) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि Corporate Tax Rate Cut Impact से बड़ी संख्या में कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ेगी। साथ ही कैपिटल गुड्स, मेटल, बैंक, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर की प्रति शेयर आय (EPS) में 11 से 12 परसेंट, इन्फ्रास्ट्रक्चर और FMCG की EPS में 10 परसेंट और NBFC, रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स कंपनियों में पांच-सात परसेंट और सीमेंट सेक्टर की ईपीएस में चार परसेंट की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

क्‍या कहा है रिपोर्ट में

जहां तक विभिन्न कंपनियों और बैंकों के प्रभावी कॉरपोरेट टैक्स दर का सवाल है, रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों में एचडीएफसी, एसबीआइ, कोटक महिंद्रा बैंक, डीसीबी, फेडरल बैंक और आरबीएल फिलहाल कॉरपोरेट टैक्स की ऊंची दरों का भुगतान कर रहे हैं। इसलिए प्रभावी दर में 10 परसेंट की कटौती का सर्वाधिक लाभ इन्हीं बैंकों को होगा।

इन कंपनियों को देना होगा इतना टैक्‍स

कंज्यूमर गुड्स कंपनियों में सबसे ऊंचे टैक्स ब्रैकेट में फिलहाल नेस्ले, कोलगेट, एचयूएल, एशियन पेंट्स, जुबिलेंट फूडवर्क्स और टाइटन जैसी कंपनियां हैं। ये कंपनियां करीब 34.9 परसेंट कॉरपोरेट टैक्स का भुगतान कर रही थीं। लेकिन दरों में इस बदलाव के बाद अब इन्हें भी 25.17 परसेंट कॉरपोरेट टैक्स का ही भुगतान करना होगा। हालांकि बजाज कॉर्प, डाबर और इमामी जैसी कंपनियां निचली दरों पर कॉरपोरेट टैक्स का भुगतान करती हैं।

इन कंपनियों को होगा सर्वाधिक लाभ

कैपिटल गुड्स क्षेत्र की एबीबी, सीमेंस, जीई टीएंडडी, इंजीनियर्स इंडिया और कोचीन शिपयार्ड को सर्वाधिक लाभ होगा। रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र की कंपनियों के लाभ में करीब 7 से 16 परसेंट की वृद्धि होने का अनुमान है।

रिलायंस कैपिटल की रिपोर्ट कहती है

रिलायंस कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक सीमेंट सेक्टर में कंपनियों के मुनाफे में वृद्धि चार-पांच परसेंट तक होने की संभावना है। इस सेक्टर की अल्ट्राटेक, एसीसी, अंबुजा और हेडलबर्ग सीमेंट को इस निर्णय का सर्वाधिक लाभ होने की उम्मीद है। रिपोर्ट का कहना है कि IT सेक्टर की अधिकांश कंपनियां पहले से ही 24-26 परसेंट कॉरपोरेट टैक्स के दायरे में हैं।