निवेश के मामले में हम क्या करते हैं? कायदे से होना यह चाहिए कि आपको कोई लक्ष्य हासिल करने के लिए निवेश करने की जरूरत महसूस हो। इसके बाद फैसला लें कि आपकी जरूरत के हिसाब से कौन सा निवेश बेहतर रहेगा। अब आप अपने चुनाव के हिसाब से निवेश करें।

फैसले की सही प्रक्रिया

मान लीजिए के आप एक दशक बाद होने वाले बड़े खर्च के लिए बचत करना चाहते हैं। इस खर्च के लिए आप जो पैसा बचाएंगे वह आपकी पूरी संपत्ति का बड़ा हिस्सा नहीं है और आपके पास समय भी है। इस तरह के मामले में इक्विटी में निवेश करना सबसे अच्छा रहेगा। एक बार यह फैसला कर लेने के बाद कई तरह के इक्विटी फंड का ट्रैक रिकॉर्ड चेक करना चाहिए और इनमें से कुछ फंड को चुन लेना चाहिए। इनमें लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन कर रहे दो या तीन इक्विटी फंड शामिल हो सकते हैं। इसके बाद आपको इनमें बराबर मात्रा में निवेश शुरू करना चाहिए।

चलिए, निवेश के इस तरीके की तुलना आम प्रचलित खरीदारी से करते हैं, जैसे टीवी खरीदने के दूसरे मॉडल पर चर्चा की गई थी। आप किसी म्यूचुअल फंड का कोई विज्ञापन देखते हैं। फिर आपको पता चलता है कि यह म्यूचुअल फंड किस तरह से बेहतर प्रदर्शन करेगा। अब आपको लगने लगता है कि आपने जहां पहले निवेश कर रखा है, उसके मुकाबले यह बेहतर है। इस तरह से आप प्रेरित होते हैं और दूसरे फंड में निवेश कर देते हैं।

कुल मिलाकर मामला यह है किनिवेश से जुड़े आपके फैसले दो तरह से प्रेरित होते हैं। एक में आप अपनी जरूरत के हिसाब से फंड का चयन करते हैं, दूसरे में बाहरी चीजों से प्रभावित होकर निवेश करते हैं और किसी दूसरे की व्यापारिक जरूरतें पूरा कर रहे होते हैं। निवेश के मामले में जब आप सावधानी से और चरणबद्ध तरीके से सोचते हैं, तो सही फैसला करना आसान हो जाता है।

Posted By: Navodit Saktawat