नई दिल्ली। आइडीबीआइ बैंक ने सोमवार को कहा कि फंसे कर्ज में बढ़ोतरी के कारण चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2018) में उसे 4,185.48 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, जो एक साल पहले की समान अवधि में हुए घाटे के मुकाबले करीब तीन गुना है। अक्टूबर-दिसंबर 2017 तिमाही में बैंक का घाटा 1,524.31 करोड़ रुपये था। बैंक की 51 फीसद हिस्सेदारी के अधिग्रहण की प्रक्रिया एलआइसी ने पूरी कर ली है और इसके बाद यह बैंक अब सरकार के स्वामित्व से निकलकर एलआइसी के स्वामित्व में आ गया है।

बैंक ने अपने बयान में कहा कि उसकी कुल आय घटकर 6,190.94 करोड़ रुपये रह गई, जो एक साल पहले 7,125.20 करोड़ रुपये थी। आलोच्य अवधि में बैंक का ग्रॉस एनपीए कुल कर्ज के मुकाबले बढ़कर 29.67 फीसद पर पहुंच गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में 24.72 फीसद था। नेट एनपीए हालांकि इस दौरान घटकर कुल कर्ज का 14.01 फीसद रह गया, जो एक साल पहले 16.02 फीसद था।

फंसे कर्ज के लिए बैलेंस शीट से अलग की गई राशि (प्रावधान) इस दौरान बढ़कर 5,074.80 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो एक साल पहले 3,649.82 करोड़ रुपये थी। एनपीए से वसूली हालांकि आलोच्य अवधि में बढ़कर 3,440 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो एक साल पहले 537 करोड़ रुपये थी।

बयान में कहा गया है कि एलआइसी ने बैंक की 51 फीसद हिस्सेदारी के अधिग्रहण की प्रक्रिया 21 जनवरी को पूरी कर ली है और इस प्रक्रिया में बैंक को एलआइसी से कुल 21,624 करोड़ रुपये हैं। बैंक ने यह भी कहा कि उसने 31 दिसंबर 2018 को नियामकीय पूंजी अनिवार्यता के स्तर को हासिल लिया और उस तिथि तक उसका कॉमन इक्विटी टियर-1 कैपिटल सुधर कर 9.32 फीसद पर पहुंच गया, जो एक साल पहले 6.62 फीसद था।