नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट की 77 फीसद हिस्सेदारी 16 अरब डॉलर (1.05 लाख करोड़ रुपये) में खरीदने वाली अमेरिकी रिटेल कंपनी वालमार्ट ने कहा है कि कंपनी भारतीय बाजार के लिए प्रतिबद्ध है और उसे ई-कामर्स में एफडीआइ के नए सख्त नियमों के बावजूद काफी उम्मीदें हैं।

ग्लोबल कंसल्टेंसी फर्म मॉर्गन स्टेनले की ताजा रिपोर्ट के बाद वालमार्ट का यह बयान आया है। उसकी रिपोर्ट में कहा गया था कि एक फरवरी से लागू हुए एफडीआइ नए नियमों से वालमार्ट के लिए भारत का कारोबारी मॉडल अत्यंत पेचीदा हो गया है। उसके कारोबार पर खासा असर पड़ने का अंदेशा है। इस वजह से वह फ्लिपकार्ट से बाहर निकल सकती है।

वालमार्ट के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट व रीजनल सीईओ (एशिया व कनाडा) डिर्क वैन डेन बर्घे ने कहा कि वालमार्ट और फ्लिपकार्ट की भारत में प्रतिबद्धता काफी गहरी और दीर्घकालिक है। हाल के बदलावों के बावजूद हम भारत में तेज विकास के लिए आशावान हैं। उन्होंने कहा कि हम ग्राहकों को सेवाएं देते रहेंगे और देश में तेज आर्थिक विकास और टिकाऊ फायदों के लिए काम करते रहेंगे।

हमारी गतिविधियों से रोजगार और किसानों व छोटे कारोबारियों को मदद के रूप में योगदान जारी रहेगा। कंपनी के ग्लोबल कारोबार के लिए भारत से निर्यात भी जारी रहेगा। सरकार ने एक फरवरी से लागू नियमों से फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसी एफडीआइ पाने वाली कंपनियों पर सख्ती बढ़ा दी है। वे किसी भी निर्माता के साथ एक्सक्लूसिव सेल का समझौता नहीं कर सकती हैं। वे अपने प्लेटफार्म पर ऐसी किसी भी कंपनी के उत्पाद नहीं बेच सकती हैं जिसमें उनकी हिस्सेदारी हो। वस्तुओं के बिक्री मूल्य में भी किसी तरह के दखल पर भी पाबंदी है।

सख्त नियमों का समर्थन किया मोहनदास पई ने

ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए सख्त नियमों का समर्थन करते हुए इन्फोसिस के पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफीसर मोहनदास पई ने सरकार ने सही दिशा में कदम उठाया है। स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने वाले एक संगठन से जुड़े पई ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि ई-कॉमर्स कंपनियां स्थानीय कारोबारियों को बाजार से बाहर करने के लिए कीमत से छेड़छाड़ कर रही थीं। हम देश में ग्लोबल कंपनियों का एकाधिकार नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हाल में लागू किए गए नए नियम तर्कसंगत हैं हालांकि तरीका गलत है।