इंदौर। सोने की चाल इन दिनों काफी दिलचस्प हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट शुरू हो गई है, लेकिन घरेलू बाजार में सोना अब तक के सबसे ऊंचे स्तर के करीब जा पहुंचा है।

अमेरिकी करेंसी में गिरावट के कारण कॉमेक्स में सोना 1,280 डॉलर प्रति औंस तक आ गया। ऊपरी स्तर से इसमें अब तक 70 डॉलर से अधिक की मंदी देखी जा चुकी है।

इसके उलट भारतीय बाजार में शादियों की खरीदी और रुपए की कमजोरी से सोना सर्वकालिक ऊंचे स्तर के करीब है। इस विरोधाभास के दौर में भारतीय बैंक अपनी खरीदी बाजार डिलिवरी आधारित करने पर जोर दे रहे हैं।

सीएमसी के मुख्य बाजार रणनीतिकार माइकल मैकार्थी के अनुसार इस समय कमजोर अमेरिकी डॉलर को देखते हुए सोने में गिरावट बने रहने की आशंका है।

हालांकि, मैककार्थी ने आगाह किया कि तकनीकी तौर पर जो संकेत मिल रहे हैं, वो निवेशकों की खरीद के साथ धीमा सुधार बुलियन में कर सकते है।

उनके अनुसार सोने के भाव 1,290 डॉलर और 1,310 डॉलर के आसपास बने रहने की संभावना है। अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना खरीदी में सहायक हो सकता है।

बाजार स्थिर रहने की संभावना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की तरफ से चीन के साथ व्यापार वार्ता से बाजार में कुछ राहत महसूस की जा रही है। इससे डॉलर में मजबूती और सोने को समर्थन मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है।

ह्वाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हसेट ने कहा है कि पहले तीन महीनों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था वृद्घि देख सकती इससे फिलहाल सोने में स्थिरता ही रहने की संभावना है।

बहरहाल, फंड आधारित निवेशकों का ध्यान यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) पर है, जो व्यापक रूप से अपनी मौद्रिक नीति को 2019 की अपनी पहली बैठक में अपरिवर्तित रख सकती है।

बाजार पर नजर रखने वाले भी ईसीबी की बैठक को डॉलर के लिए नकारात्मक बता रहे हैं। कॉमेक्स नॉन-कमर्शियल और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में सोने की होल्डिंग बढ़ाई गई है, लिहाजा इसमें अधिक गिरावट जैसी स्थिति भी नजर नहीं आ रही। दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड ईटीएफ एसपीडीआर की होल्डिंग भी जून, 2018 के बाद से उच्चतम स्तर है।

भारतीय बैंकों की खरीदी कमजोर

पिछले दो महीनों के दौरान भारतीय बैंकों ने डिलिवरी आधारित खरीदी पर जोर दिया है। इसके लिए सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों पर सोने की खरीदी सीमित करने के लिए सरकारी दबाव भी है।

सरकार रुपए की कमजोरी के बीच डॉलर रिजर्व को सोने की खरीदी में खपाने से बचाने के लिए इस रणनीति पर काम कर रही है।

बावजूद इसके खरीदी का सर्मथन और शेयर बाजार में म्यूचुअल फंड के जरिए पिछले चार साल के औसत रिटर्न उम्मीद से कम रहने के कारण सोने में एक बार फिर निवेश के लिए खरीदी बढ़ने की बात कही जाने लगी है।

इसके कारण भारतीय बाजार में सोने की कीमत अगस्त, 2013 से अब तक के सबसे ऊंचा स्तर पार कर गया है।

इस भाव पर बाजार पिछले 10 दिन से स्थिर है। इस दौरान डॉलर के मुकाबले रुपए की विनिमय दर कमजोरी बने रहने से सोने की चमक बढ़ी है।