जयदीप बनर्जी, को फाउंडर, Dvara SmartGold

भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है। भारत में 75 फीसदी से अधिक परिवारों के पास किसी न किसी रूप में मौजूद सोना है। यह पिछले 50 साल में 14.5 फीसदी सालाना (14.5% CAGR) के हिसाब से बढ़ा है। यह आज के वैश्विक परिवेश में सबसे अधिक मांग वाली कमोडिटी यानी वस्तुओं में से एक है। भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग लगभग 6.5 लाख करोड़ रुपये का है और एमएसएमई का 90-95 फीसदी हिस्सा इसी उद्योग का है। यह संपूर्ण वैल्यू चेन यानी मूल्य श्रृंखला में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से करीब 61 लाख लोगों को रोजगार देता है। साल के अंत तक, इस क्षेत्र में लगभग 94 लाख रोजगार का अनुमान है, जो 33 लाख की बढ़ रही मानव संसाधन आवश्यकता को दिखाता है। इसके अलावा, 60 फीसदी सोने के आभूषण ग्रामीण भारत में बेचे जाते हैं। इस ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की वित्तीय सुरक्षा से जुड़ी कुछ समस्याएं हल होती हैं। इससे लाभ और विकल्पों का एक विस्तृत श्रृंखला खुली है, जिसका अभी परिसंपत्ति वर्ग के साथ पता लगाया जाना है।

महंगाई और बाजार की अस्थिरता के दौरान सुरक्षा

वित्तीय जानकारों के विपरीत विचारों के बावजूद, निवेशक अपने दीर्घकालिक निवेश का लक्ष्य पूरा करने के लिए सोने को एक संपत्ति के रूप में मानते हैं। वहीं इसका उपयोग महंगाई और बाजार की अस्थिरता के दौरान सुरक्षा या बचाव के लिए करते हैं। सोना बाजार के उठा पटक के दौर में सुरक्षा वित्तीय सुरक्षा देता है, वहीं महंगाई के खिलाफ बचाव का काम करता है। इंडिया गोल्ड पॉलिसी सेंटर (IGPC) द्वारा किए गए एक राष्ट्रीय घरेलू सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में मध्यम आय वर्ग या परिवार, जिनकी आमदनी 2-10 लाख रुपये सालाना है, अमीरों की तुलना में सोने में अधिक निवेश करते हैं। देश में हर साल सोने की कुल खपत का 56 फीसदी हिस्सा इनके द्वारा किया जा रहा है, जो 800-850 टन के बराबर है। केरल सोने के गहनों पर खर्च करने के मामले में पहले स्थान पर है, जिसका प्रति व्यक्ति खर्च गोवा की तुलना में 6 गुना अधिक है। गोवा इस खर्च सूचकांक में दूसरे स्थान पर आता है। इसके अलावा, ग्रामीण केरल में भी सोने के गहनों पर प्रति व्यक्ति खर्च सोने की खपत के मामले में अन्य सभी 6 शीर्ष राज्यों के कुल प्रति व्यक्ति खर्च से बहुत ज्यादा है।

लगातार बढ़ रही हैं कीमतें

हालांकि, सोने की लगातार बढ़ रही कीमतों से अक्सर इस पीली धातु को खरीदना मुश्किल हो जाता है। 2022 में सोने की कीमत 52,690 रुपये (24 कैरेट प्रति 10 ग्राम) है, जबकि 2021 में यह 48,720 रुपये थी। इसलिए, ग्राहकों को छोटी बचत करने का मौका देकर, सोना नियमित तौर पर खरीदे जाने वाला एक संपत्ति बन गया है। सोने में निवेश के जरिए निवेशकों की तरलता की स्थिति में सुधार हुआ है, वहीं उनकी बहुत सी आकांक्षाएं भी पूरी हो रही है।

भारत में सोने का भावनात्मक महत्व भी

सोने की बात करें तो एक परिसंपत्ति वर्ग के रूप में स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है। सोना निवेश का एक ऐसा जरिया है, जिसे ग्रामीण भारत बेहद ही सहज रूप से समझता है और पीढ़ियों से इसका उपयोग करता आ रहा है। यह सामाजिक स्थिति और सामरिक संपत्ति दोनों का प्रतीक है। भारत जैसे देश में इसका भावनात्मक महत्व है और आपात स्थिति में एक रणनीतिक संपत्ति की भूमिका निभाता है। क्योंकि यह पूंजी को सुरक्षित रखने में सहायता करता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत ही तरलता प्रदान करता है। हालिया दशक की बात करें तो इसने निवेशकों के मन में भरोसा जीता है और एक मूल्यवान निवेश का जरिया बन गया है। आर्थिक उथल-पुथल और स्थिरता दोनों समय में, सोने ने निवेशकों की संपत्ति को सुरक्षित रखा है। भारत में, विशेष रूप से ग्रामीण बाजारों में, ग्राहकों के पास म्यूचुअल फंड और इक्विटी जैसे वित्तीय या बचत साधनों तक सीमित पहुंच है, जिसके चलते दुनिया के किसी भी देश की तुलना में यहां सोने की मांग और बढ़ जाती है।

निवेश के लिए एक सुरक्षित जरिया

सोने को निवेश के लिए एक सुरक्षित जरिया माना जाता है जो बाजार के उतार चढ़ाव और महंगाई के दौर में बचाव का काम करता है। अप्रैल 2022 तक, सीपीआई 7.5 फीसदी से अधिक था और विश्लेषकों का मानना है कि हम इक्विटी बाजारों में एक मंदी के दौर में प्रवेश कर सकते हैं। इसके पीछे वजह यह है कि आरबीआई द्वारा भविष्य में दरों में बढ़ोतरी के संभावना के चलते बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई है। इसलिए वित्तीय बाजारों में अस्थिरता का सामना करने के लिए सोने को एक सुरक्षित दांव के रूप में देखा जाता है।

हाल ही में, सोने में काफी तेजी आई क्योंकि निवेशकों ने मजबूत वैश्विक रुझानों और निवेश के सकारात्मक भावनाओं के आधार पर परिसंपत्ति वर्ग का चुनाव किया। चीन में औद्योगिक उत्पादन में गिरावट और लंबी अवधि के लॉकडाउन के चलते भारत में सोने की कीमतों में तेजी आई है। इसके अलावा, तेल उत्पादक देशों यानी ओपेक सदस्यों द्वारा मांग घटने के अनुमान के बाद भी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे सोने के भाव भी बढ़े। अभी कच्चे तेल और तेल उत्पादों की रिकॉर्ड मात्रा जारी करने की योजना से कच्चे तेल के 100 डॉलर से नीचे आने और चीन में निरंतर कोरोनावायरस लॉकडाउन से भारत में बाजार की अस्थिरता प्रभावित हुई है। जिससे सोने की कीमतों में गिरावट आई है।

गोल्ड लोन बाजार की स्थिति

संगठित गोल्ड लोन बाजार की तुलना में, भारत में असंगठित बाजार की उपस्थिति काफी मजबूत है। गोल्ड लोन बाजार में असंगठित क्षेत्र का 65 फीसदी हिस्सा है, जिसमें साहूकार, बिचौलिए और अपंजीकृत गोल्ड लोन देने वाली कंपनियां शामिल हैं। यह संरचना नए जमाने की फिनटेक कंपनियों के बाजार में आने के साथ बदल जाएगी, जो अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और नए उत्पादों द्वारा माइक्रोफाइनेंस, ग्रामीण बचत, बीमा और बैंक खातों के क्षेत्र में वित्तीय उत्पादों की पूर्ति करेंगी।

1 ग्राम में भी कर सकते हैं निवेश

उदाहरण के लिए, कुछ कंपनियां ग्राहकों को नियमित परिसंपत्ति वर्ग की तरह सोने में सूक्ष्म बचत करने की अनुमति देती हैं, लेकिन पारंपरिक चैनलों से जुड़ी असुविधाओं के बिना। ये कंपनियां खास तरीके से डिजाइन किए गए गोल्ड माइक्रो-सेविंग प्लान के जरिए ग्राहकों को छोटी लचीली किस्तों (एसआईपी) में निवेश करने की सुविधा देती हैं। ग्रोहक अपने पास उपलब्ध नकद के अनुसार 1 ग्राम भी सोना खरीद सकते हैं। उनका उत्पाद परिवारों को बिना किसी रुकावट के और डिजिटल रूप से वित्तीय सुरक्षा जाल बनाने में मदद करता है। ग्राहकों के लिए आपात स्थिति के दौरान अपनी बचत का उपयोग करने या छोटे या दीर्घकालिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिससे सोने में निवेश के बदले भविष्य को सुरक्षित करने में मदद मिलती है।

उद्योग के लिए, एक परिसंपत्ति वर्ग के रूप में सोने पर आधारित वित्तीय सेवाओं का निर्माण करने का विचार एक रोमांचक अवसर होने जा रहा है। सोना न सिर्फ अस्थिरता या महंगाई से रुक्षा देता है, बल्कि यह लाखों परिवारों की आकांक्षाओं को सशक्त और सक्षम बनाता है।

Posted By:

  • Font Size
  • Close