अरुणिम महापात्रा। सोने में रिकॉर्ड तोड़ तेजी दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं को लेकर जोखिम का संकेत दे रहा है। सोने में मौजूदा तेजी की सबसे बड़ी वजह निवेश बढ़ना है और पोर्टफोलियो में इस एसेट क्लास का हिस्सा तभी बढ़ाया जाता है, जब निवेशक को जोखिम बढ़ने की चिंता सता रही हो। फिलहाल हालात संकेत दे रहे हैं कि सोने की चमक बनी रहेगी।

दुनियाभर की अर्थव्यवस्था में सुस्ती, ज्यादातर बड़े देशों में ब्याज दरें घटाए जाने का सिलसिला शुरू होने और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से सोने के लिए एक बार फिर सुनहरा दौर आया है। पिछले एक महीने के दौरान घरेलू बाजार में सोने की कीमत करीब 9 प्रतिशत बढ़ गई है। जनवरी से अब तक सोना लगभग 21 प्रतिशत महंगा हो गया है। कुल मिलाकर सोना अब तक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, लेकिन तेजी थमने के आसार कम ही हैं। हालांकि बीच-बीच में मुनाफावसूली के चलते सोने की कीमतों में हल्का उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है।

मोटे तौर पर सोने में तेजी का एक ही कारण है। लगातार बढ़ता निवेश। दुनियाभर के निवेशक तो सोने में पैसा लगा रही रहेहैं, तमाम बड़े देशों के केंद्रीय बैंक भी पिछले कुछ महीनों से सोने में ताबड़तोड़ खरीद कर रहे हैं। रूस और चीन इस मामले में सबसे अगे हैं। मसलन, 2018 के दौरान दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने 657 टन सोने की खरीदारी कर डाली। यह अब तक का रिकॉर्ड है। पिछला रिकॉर्ड 2014 में बना था, जब उन्होंने 584 टन सोना खरीदा था। 2019 में पिछले साल का रिकॉर्ड भी टूट सकता है। पहली छमाही में ही केंद्रीय बैंकों ने 374 टन सोने की खरीदारी कर डाली है। इसका मतलब है कि यदि मौजूदा ट्रेंड जारी रहा तो पूरे सोने में उनकी खरीदारी 700 टन से भी ऊपर निकल सकती है।

सोने का रिटर्न

एक हफ्ते में: 6.73 प्रतिशत

एक महीने में: 9 प्रतिशत

इस साल अब तकः 21

सालाना आधार परः 27 प्रतिशत

सेंट्रल बैंकों की खरीदारी

साल खरीदारी टन में

2014 - 584

2015 - 576

2016 - 390

2017 - 377

2018 - 657

2019* - 374

(*पहली छमाही में)

माहौल में अनिश्चितता का असर

अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर गहराने की वजह से निवेशकों ने सोने में निवेश बढ़ा दिया है। इसकी वजह से पिछले हफ्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव प्रति औंस 1,500 डॉलर प्रति औंस (28.35 ग्राम) का स्तर पारकर गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस साल अब तक सोने की कीमत करीब 16 फीसदी बढ़ी है। पिछले एक हफ्ते में सोना लगभग 100 डॉलर प्रति औंस महंगा हंआ है। इसका असर घरेलू बाजार के रुझान पर भी हुआ। भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदी जैसे हालात की वजह से भी सोने जैसे सुरक्षित माने जाने वाले एसेट क्लास के प्रति निवेशकों का रुझान बढ़ा है। मध्यम अवधि में सोने की कीमत ऊंची रहने के पूरे आसार हैं।

तेजी के कुछ बड़े कारण

1. ट्रेड वॉर

अमेरिका और चीन के बीच कारोबार को लेकर युद्घ जैसी स्थिति का नतीजा है कि चीन की आर्थिक विकास दर करीब 30 साल के निचले स्तर पर आ गई। इसके कारण घबराहट बढ़ी और लोन सोने में निवेश करने लगे। यहां गौर करने वाली बात है कि चीन में सोने की सबसे ज्यादा खपत होती है।

2. ब्रक्जिट

यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने की तारीख नजदीक आ रही है। इस वजह से वहां सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) में 2012 के बाद पहली बार गिरावट आई। चूंकि ब्रिटेन विकसित अर्थव्यवस्था है, लिहाजा वहां की मंदी पूरी दुनिया पर असर डालती है। इससे सोने को सपोर्ट मिल रहा है।

3. धारा 370

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीरको विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 को खत्म कर दिया। इसके कारण पाकिस्तान के साथ भारत के संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए। वहां की सरकार ने भारत के साथ कारोबारी संबंध तोड़ लिए और दोनों देशों के बीच ट्रेन सेवा बंद कर दी। ये कदम तनाव बढ़ने के संकेत दे रहे हैं, जिसके कारण सोने में निवेश बढ़ गया है।

4. शेयर बाजार

हालांकि पिछले हफ्ते घरेलू शेयर बाजार बढ़त पर बंद हुआ, लेकिन उससे पहले सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर सरचार्ज लगाने का फैसला इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। अब भी यकीन के साथ नहीं कहा जा सकता कि इस हफ्ते बाजार का रुझान सुधरेगा। ऐसे में निवेशक इक्विटी से पैसे निकालकर सोने में लगा रहे हैं।

5. कमजोर करेंसी

भारत से विदेशी पूंजी लगातार निकलने के कारण डॉलर के मुकाबले रुपए की विनिमय दर में गिरावट आई है। दूसरी तरफ चीन अमेरिका को सबक सिखाने के लिए अपनी करेंसी यूआन का खुद ही अवूल्यन कर दिया है। इस वजह से इन दोनों देशों में सोना खुद ही महंगा हो गया। ये दोनों देश सोने की अधिकांश जरूरत आयात से पूरी करतेहैं।

6. हांगकांग के घटनाक्रम

कांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों के प्रदर्शन ने आक्रामक रुख ले लिया है। इस बार उन्होंने प्रदर्शन के लिए शहर के मुख्य एयरपोर्ट को चुना है। लेकिन, चीन के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। बीजिंग का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने जो आग लगाई है, उसी में जलकर खत्म हो जाएंगे। बाजार देखना चाहता है कि बीजिंग कब तक इस तरह के प्रदर्शन होने देता है। संभव है कि इसकी परिणति भारी हिंसा के साथ हो। सोने के लिए यह मुफीद घटनाक्रम साबित हो रहा है।

7. आईईए का अनुमान

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने पिछले हफ्ते शुक्रवार को अनुमान लगाया कि आगामी दिनों में कच्चे तेल की वैश्विक मांग रोजना एक लाख बैरल तक घटेगी। एजेंसी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता और बढ़ते ट्रेड वॉर को इसकी वजह बताई। यह कच्चे तेल की कीमतों गिरावट की जमीन तैयार करेगा, जिसका असर अंततः सोने में तेजी के तौर पर नजर आएगा।

मंदी में क्यों महंगा हो जाता है सोना?

दरअसल सोने की उपभोक्ता मांग बढ़ने से इसमें ज्यादा तेजी नहीं आती, बल्कि सोने में उछाल निवेश मांग बढ़ने का नतीजा होता है। जब कभी घरेलू या वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की गिरफ्त में आती है, निवेशकों को अपने-अपने निवेश को लेकर जोखिम बढ़ने की आशंका सताने लगती है। ऐसे हालात में सोना हेजिंग (निवेश का जोखिम कम करने का तरीका) का सबसे मजबूत जरिया बन जाता है। जब निवेश के दूसरे साधन अच्छा रिटर्न न दे रहे हों तो लोग सोने में निवेश को प्राथमिकता देने लगते हैं। अभी यही हो रहा है। ओवरसीज-चाइनीज बैंकिंग कॉरपोरेशन के अर्थशास्त्री होवी ली का कहना है, 'अभी दुनिया अनि￝ािता की स्थिति में है। सोने को इसका लाभ मिल रहा है।'

आगे की संभावना

सिंगापुर बैंक के एक अर्थशास्त्री का कहना है कि दुनियाभर के घटनाक्रम इन दिनों सोने में तेजी को हवा-पानी दे रहे हैं। उन्हें लगता है कि कम से कम अगले 6-12 महीने सोने में तेजी बनी रहेगी। असल में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां पूरी दुनिया में अनिश्चितता बढ़ा रही है। चीन, ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों को लेकर उनका रवैया वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता बढ़ा रहा है। इसका सीधा असर सोने की कीमतों पर हो रहा है। भारत में अंदाजा लगाया जा रहा है कि निकट भविष्य में सोना 40 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर तक जाएगा। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली तक सोने की कीमत 42 हजार रुपए के स्तर तक भी जा सकती है।

जोखिम कम करने की जल्दबाजी

ओवरसीज-चाइनीज बैंकिंग कॉरपोरेशन के होवी ली का कहना है, 'हम फिलहाल सोने के लिए मजबूत स्थिति देख रहे हैं। मसलन, अभी लगभग सभी देशों में ब्याज दरें निचले स्तर पर हैं, डॉलर कमजोर हो रहा है, व्यापार को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है और खाड़ी देशों में भू-राजनीतिक तनाव गहरा गया है।' ये ऐसी चीजें हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के जोखिम बढ़ा रहे हैं। ऐसे हालात में निवेशक हेजिंग के लिए सोने की तरफ देख रहे हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना छह साल से भी ज्यादा समय के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इन दिनों निवेशकों के लिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है कि निकट भविष्य में वैश्विक अर्थव्यवस्था का ऊंट किस करवट लेगा। जाहिर है, वे जोखिम कम करने के लिए सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं।