सोने के दामों में मंगलवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट रही। MCX पर June gold 0.35% फीसदी सस्ता होकर 43,232 रुपए प्रति 10 ग्राम रहा। वहीं MCX पर Silver futures में 0.3 फीसदी की तेजी रही और यह 39,925 प्रति किलो पर रही। पिछले सत्र में चांदी 1,000 रुपए सस्ती हुई थी। बता दें, सोने ने हाल के दिनों में भारी उतार-चढ़ाव देखा है। 45,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंचने के बाद सोना 4000 रुपए तक सस्ता हो गया था।

जानिए ग्लोबल मार्केट का हाल

ग्लोबल मार्केट में भी सोना सस्ता हुआ है। इसके पीछे इक्विटी मार्केट की तेजी और डॉलर की मजबूती को कारण बताया गया है। हालांकि कोरोना वायरस का महामारी का रूप धारण करने की आशंका अब भी निवेशकों के मन मे है। Spot gold 0.3 फीसदी की गिवारट के साथ 1,616.34 डॉलर प्रति औंस रहा। अन्य कीमती धातुओं में प्लेटिनम के दाम 0.5 फीसदी बढ़कर 727.06 डॉलर हो गए हैं। वहीं चांदी 0.7 फीसदी सस्ती होकर 14.02 डॉलर बिकी है।

कोरोना वायरस का असर, भारत में आर्थिक सुस्ती की आशंका

इस बीच, कोरोना वायरस से निपटने में लगे भारत के लिए बुरी खबर है। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच सोल्यूशंस ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए भारत की आर्थिक वृद्घि को लेकर अनुमान घटाकर 4.6 प्रतिशत कर दिया। इंडिया रेटिंग्स ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार कम होने का अनुमान लगाया है।

कारोना वायरस महामारी के चलते निजी खपत कमजोर पड़ने और निवेश घटने की वजह से एजेंसी ने ऐसा किया है। कोरोना का असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर देखा जा रहा है। फिच ने मंगलवार को खत्म हो रहे वित्त वर्ष (2019-20) में आर्थिक वृद्घि दर 4.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। इस बीच, इंडिया रेटिंग्स ने अगले वित्त वर्ष (2020-21) के लिए आर्थिक वृद्घि दर का अनुमान कम करके 3.6 प्रतिशत कर दिया है।

फिच सोल्यूशंस ने कहा, '2020-21 के लिए वास्तविक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्घि दर 4.6 रहने का अनुमान है। पहले 5.4 प्रतिशत आर्थिक विकास दर की संभावना जताई गई थी। हमने 2019-20 में 4.9 प्रतिशत आर्थिक वृद्घि के अनुमान के जरिए जो नरमी की बात कही थी, वह अब दिखाई दे रही है।' रेटिंग एजेंसी के मुताबिक पिछले सप्ताह घोषित 1.7 लाख करोड़ रुपए के पैकेज के बावजूद आगामी महीनों में निजी खपत में वृद्घि प्रभावित होने की आशंका है।

खपत और निवेश में कमी

फिच के मुताबिक आर्थिक वृद्घि दर को लेकर अनुमान कम करने का कारण निजी खपत में कमी और निवेश में गिरावट है। हालांकि, शुद्घ रूप से निर्यात योगदान अधिक होने और उधा सरकारी खपत से अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस का प्रभाव कम करने में मदद मिलनी चाहिए।

जोखिम बढ़ने की आशंका

फिच ने यह भी कहा कि भारत में कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को देखते हुए विकास दर का अनुमान और नीचे आने का जोखिम है। ऐसी आशंका है कि कोरोना के जो मामले नजर आ रहे हैं, वे हकीकत से कम हैं और यह फिलहाल शुरुआती आंकड़े हैं। फिच ने कहा, 'कमजोर स्वास्थ्य प्रणाली के साथ पहले से दबाव झेल रही स्वास्थ्य सुविधाएं भारत में संक्रमण रोकने की क्षमता को प्रभावित करेंगे। इन सबका अर्थव्यवस्था, खास तौर पर 2020-21 की दूसरी छमाही में काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

इंडिया रेटिंग्स की रिपोर्ट

घरेलू रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ने कोरोना वायरस महामारी को लेकर बढ़ रही चिंता के बीच वित्त वर्ष 2020-21 के लिए आर्थिक वृद्घि दर को लेकर अनुमान घटाकर 3.6 प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जून तिमाही में वृद्घि दर 2.3 प्रतिशत ही रहने की आशंका है, जबकि चालू वित्त वर्ष की मार्च तिमाही में यह 4.7 प्रतिशत रह सकती है। एजेंसी ने कहा कि कोरोना वायरस का स्पष्ट प्रभाव चुनिंदा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उत्पादन बाधित होने के रुप दिख रहा है। इसका कारण आपूर्ति श्रृंखला टूटना और पर्यटन, होटल एवं विमानन क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ना है।

Posted By: Arvind Dubey

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