सैन फ्रांसिस्को। डिजिटल विज्ञापन के बढ़ते बाजार और स्मार्टफोन की मांग सुस्त पड़ने की वजह से एक बड़ा उलटफेर हो सकता है। गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट जल्द ऐपल को पछाड़कर दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी बन सकती है।

यदि ऐसा हुआ, तो अल्फाबेट के अस्तित्व में आने के महज 5 महीनों बाद ही उसे ऐतिहासिक सफलता मिल जाएगी। गूगल खुद को पुनगर्ठित करके होल्डिंग कंपनी अल्फाबेट के अधीन आ गई थी।

बहरहाल, गुरूवार को बाजार बंद होने तक ऐपल की मार्केट वैल्यू 522 अरब डॉलर थी, जबकि अल्फाबेट की 515 अरब डॉलर। महज 13 महीने पहले दोनों कंपनियों के बीच फासला इस कदर कम नहीं था। तब ऐपल की मार्केट वैल्यू 643 अरब डॉलर थी, जबकि गूगल इंक की केवल 361 अरब डॉलर।

हाल के महीनों में हालात तेजी से बदलते चले गए। निवेशकों ने ऐपल के प्रति बेरुखी दिखाई। वजह यह रही कि एपल लंबे समय से कोई नया ट्रेंड-सेटिंग प्रोडक्ट पेश करने में विफल रही है, जबकि कंपनी के सबसे अहम प्रोडक्ट आईफोन को बाजार में आए तकरीबन 9 साल हो गए।

दिक्कत यह है कि ऐपल की समग्र बिक्री में आईफोन की हिस्सेदारी लगभग दो तिहाई है, जिसकी बिक्री बढ़ने की रफ्तार कम हो गई है।

ऐपल पहले ही स्वीकार कर चुकी है कि 2007 के बाद इस साल पहली बार आईफोन की तिमाही बिक्री घटेगी। इन समस्याओं के कारण 2014 से लेकर अब तक ऐपल के शेयर की कीमत करीब 15 प्रतिशत घट गई है। दूसरी तरफ गूगल ने इंटरनेट सर्च और विज्ञापन बाजार में अपनी बादशाहत बरकरार रखी है।

इसके साथ-साथ कंपनी वीडियो, मोबाइल, वेब ब्राउजिंग, ई-मेल और मैपिंग जैसे दूसरे लोकप्रिय प्रोडक्ट्स भी पेश करती रही है। गूगल की ये तमाम सर्विसेज अल्फाबेट की आय बढ़ने में अहम भूमिका निभा रही हैं। इसके अलावा उम्मीद जताई जा रही है कि आगे की ग्रोथ रेट 15-20 प्रतिशत रहेगी।

अल्फाबेट ने खर्च में भारी कटौती करके भी निवेशकों को आकर्षित किया। गूगल ने मई, 2015 में वॉल स्ट्रीट के वरिष्ठ दिग्गज रुथ पोराट को चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर बनाया। इसके बाद पोराट ने अल्फाबेट के बोर्ड को इस बात के लिए राजी कर लिया कि कंपनी खुद के शेयर वापस खरीदने में 5 अरब डॉलर खर्च करे। कंपनी के इस कदम से निवेशकों के बीच अच्छा संदेश गया।

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