नई दिल्ली। अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी विदेशी स्वामित्व वाली ई-कॉमर्स कंपनियों को सरकार तगड़ा झटका दिया है। सरकार ने पहली फरवरी से लागू नए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) नियमों के पालन की तारीख में राहत देने से इनकार कर दिया है। शुक्रवार से ई-कॉमर्स कंपनियों पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नए दिशा निर्देश लागू हो जाएंगे। औद्योगिक संवर्धन व आंतरिक निवेश विभाग (डीपीआइआइटी) ने एक बयान में कहा है कि उसे नए दिशानिर्देशों के लागू होने की समय सीमा आगे बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव प्राप्त हुए थे।

विभाग ने इन सभी प्रस्तावों पर विमर्श करने के बाद तय समय सीमा को आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है। वालमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट और अन्य अमेरिकी कंपनी अमेजन ने पहली फरवरी की सीमा को आगे बढ़ाने का सरकार से आग्रह किया था। इन कंपनियों का कहना था कि इन्हें नए दिशानिर्देशों को समझने के लिए और वक्त चाहिए। फ्लिपकार्ट इस अवधि को छह माह आगे बढ़वाना चाहती थी।

हालांकि अमेजन पहली जून से इसे अपनाने के लिए खुद को तैयार बता रही थी। सरकार ने बीते साल 26 दिसंबर को ही ई-कॉमर्स पर एफडीआइ नीति में बदलाव करते हुए ऐसी कंपनियों के लिए नियमों को कड़ा बनाने का एलान किया था जिनमें विदेशी हिस्सेदारी है। नए नियमों में ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर ऐसे वेंडर्स का सामान बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है जिनमें इन ई-कामर्स कंपनियों की खुद की हिस्सेदारी हो। इसके अलावा एक्सक्लूसिव बिक्री के ऐसे ऑफर पर भी रोक लगाई गई है जिससे उत्पादों की कीमतें प्रभावित होती हों।

दूसरी तरफ खुदरा व्यापारियों के संगठन कैट और स्वदेशी जागरण मंच जैसी संस्थाओं ने सरकार पर इन कंपनियों को छूट न देने के पक्ष में लगातार दबाव बनाया हुआ था। कैट ने तो ई-कामर्स कंपनियों को समय सीमा में राहत देने की सूरत में देशव्यापी आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी थी।

अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों का कारोबार प्रभावित होगा, क्योंकि उनकी होलसेल शाखाएं थोक में सामान खरीदकर उसे अपने ही प्लेटफॉर्म पर मौजूद रिटेलरों के हाथों बेच देती हैं और वे रिटेलर इसे आगे ग्राहकों को बेचते हैं। - 'यह प्रोडक्ट सिर्फ हमारी वेबसाइट पर' अब नहीं चलेगा, क्योंकि ऑनलाइन मार्केटप्लेस किसी भी उत्पाद की बिक्री का एक्सक्लूसिव करार नहीं कर पाएंगे - जिस कंपनी में ऑनलाइन मार्केटप्लेस की हिस्सेदारी होगी, उसके सामान उस वेबसाइट पर नहीं बिकेंगे। इसमें भारतीय कंपनियां भी प्रभावित होंगी।

मसलन, शॉपर्स स्टॉप अब अमेजन इंडिया पर सामान नहीं बेच पाएगी, क्योंकि शॉपर्स स्टॉप में अमेजन की आंशिक हिस्सेदारी है। यही मिंत्रा-जेबांग के साथ भी होगा, जो फ्लिपकार्ट पर अपना सामान नहीं बेच सकेंगी। - कोई ऑनलाइन कंपनी किसी भी रिटेलर को अपनी स्पर्धी के प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने से नहीं रोक सकेगी।