नई दिल्ली No cost EMI। त्योहारी सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग में बढ़ोतरी होने की संभावना है और फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसी कंपनियां फेस्टिवल सीजन में सेल और डिस्काउंट शुरू करेगी। इस दौरान कंपनियां अपने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई तरीके अपनाती है। इसमें एक है No cost EMI, जिसमें मूल राशि की ही किश्तें देना होती है। उपभोक्ता को ईएमआई में ब्याज की राशि नहीं जोड़ी जाती है। वैसे ग्राहकों को लिए No cost EMI कोई बुरा विकल्प नहीं है। ग्राहक को कोई भी सामान खरीदने पर पूरी कीमत भी नहीं चुकाना पड़ती है और किश्तों पर बगैर ब्याज के एडवांस में सामान भी उपलब्ध हो जाता है। लेकिन कई बार लोग सोचते हैं कि आखिर बगैर ब्याज के No cost EMI योजना काम कैसे करती है। इसमें बैंक या कंपनी को आखिर क्या फायदा होता है। आइए जानते हैं No cost EMI के बारे में विस्तृत जानकारी और क्या सच में बैक अपने ग्राहकों से ब्याज नहीं वसूलता है।

No cost EMI पर ये है रिजर्व का नियम

No Cost EMI योजना पर रिजर्व बैंक का 17 सितंबर 2013 का सर्कुलर बताता है कि 'कोई भी लोन ब्याज मुक्त नहीं है। क्रेडिट कार्ड आउटस्टैंडिंग्स पर जीरो पर्सेंट EMI स्कीम में ब्याज की रकम की वसूली अक्सर प्रोसेसिंग फीस के रूप में कर ली जाती है। जैसे कुछ बैंक लोन का ब्याज प्रॉडक्ट से वसूल रहे हैं। कुल मिलाकर सीधा फंडा यह है कि फ्री में तो कुछ भी नहीं मिलता है। No Cost EMI दिखने में तो बगैर ब्याज की योजना लगती है, लेकिन इसके पैसे भी ग्राहक से ही वसूले जाते हैं।

ऐसे काम करता है No cost EMI का मॉडल

- मान लीजिए आपने 20,000 रुपए का मोबाइल खरीदा।

- क्रेडिट कार्ड से पेमेंट किया और No Cost EMI के जरिए उसे 12 महीने की EMI बनवा ली

. 12 महीने के लिए हर माह 1667 रुपए की EMI बनी

- 1667 X 12 = 20,004 कुल कीमत ग्राहक द्वारा चुकाई जाती है।

बैंक या कंपनी को ऐसे हुआ फायदा

- ऑनलाइन कंपनी ने मैन्युफैक्चरिंग कंपनी से मोबाइल MRP पर नहीं लिया। कंपनी को यह मोबाइल लगभग 14 से 16 हजार के बीच पड़ा होगा।

- कंपनी ग्राहक को 20,000 में बेचती है तो एक मोबाइल पर 4000 रुपए का लाभ हुआ

- यदि एक माह में कंपनी ने No cost EMI योजना के तहत 1000 मोबाइल बेचे तो 1000 X 4000 = 40,00,000 का लाभ होगा।

- हर माह ऑनलाइन कंपनी सिर्फ मोबाइल पर 40 लाख रुपए कमाती है।

- अभी तक इसमें बैंक की एंट्री नहीं हुई है। बैंक की एंट्री इन योजना में चार चांद लगाते हुए प्राफिट को बढ़ा देती है।

- बैंक कंपनी को स्कीम समझाता है कि वो एक मोबाइल पर हो रही कमाई 4000 रुपये में से 2000 उसको दे दे।

. इसके बदले बैंक कंपनी को ग्राहक को No cost EMI का विकल्प देना शुरू कर देता है, जिससे कंपनी की सेल बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनी 1000 से जगह अब ज्यादा मोबाइल बेचने लगती है और अपना जो 2000 का फायदा बैंक को दे रही है, उसकी भी भरपाई कर लेती है।

Posted By: Sandeep Chourey

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