नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआइएल) के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि भारत अन्य देशों से पहले अपने यहां 5जी सेवा लागू करने की स्थिति में है। नई तकनीकों के आने से भविष्य में दूरसंचार उद्योग में ऐसा अप्रत्याशित विकास संभव है कि कम कीमत और युनिवर्सल कनेक्टिविटी के बल पर भारत चौथी औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व कर सकता है।

इंडिया मोबाइल कांग्रेस के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए अंबानी ने कहा कि दो वर्ष पहले तक मोबाइल डाटा के उपयोग के मामले में भारत का विश्व में 155वां स्थान था। परंतु अब वह पहले नंबर पर आ चुका है। जब रिलायंस जियो की फाइबर आधारित सेवाएं पूरी तरह चालू होंगी तब ब्राडबैंड सेवाओं के उपयोग के मामले में भी भारत मौजूदा 135वें स्थान से उठकर तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है।

देश-विदेश के प्रमुख मोबाइल आपरेटरों, निर्माताओं और संचार विशेषज्ञों के सम्मेलन में रिलायंस जियो के मुखिया ने कहा, '2जी/3जी से 4जी में इतना तेज पदार्पण विश्व में कहीं नहीं हुआ है। इसलिए मेरा मानना है कि 2020 तक भारत में 4जी पूरी तरह लागू हो जाएगा और वह अन्य देशों के मुकाबले 5जी को पहले लागू करने की स्थिति में होगा।'

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद, संचार मंत्री मनोज सिन्हा, शहरी विकास राज्यमंत्री हरदीप पुरी तथा अन्य दिग्गजों की मौजूदगी में अंबानी ने कहा कि जियो प्रत्येक व्यक्ति और वस्तु को उच्च गुणवत्ता एवं सर्वाधिक कम कीमत पर हर जगह एवं समय कनेक्ट करने के लिए प्रतिबद्ध है। पहले ही दिन से जियो गीगाफाइबर फिक्स्ड व मोबाइल फोन नेटवर्क के बीच इस प्रकार का समन्वय पेश करेगा, कि लोग चलते-फिरते मोबाइल नेटवर्क के साथ और घर या दफ्तर में बैठे हुए वाई-फाई के साथ 4जी और 5जी का निरंतर उपयोग कर सकेंगे।

हालांकि इस उपयोग के कुछ अन्य पहलुओं से सावधान करते हुए अंबानी ने कहा, 'हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि नए विश्व में डाटा अत्यंत महत्वपूर्ण संसाधन है और लोग बड़े पैमाने पर डाटा का सृजन करेंगे। इसलिए हमें इस समृद्ध संसाधन का उपयोग भारत और भारतीयों के फायदे के लिए करना होगा और साथ ही इसकी सुरक्षा के उपाय भी करने होंगे।'

इस क्रांति से 15 करोड़ भारतीयों व किसानों की आमदनी दोगुना करने में मदद मिल सकती है। 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का आयुष्मान भारत स्कीम का लक्ष्य पूरा हो सकता है, 20 करोड़ छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा सकती है तथा छोटे व्यापारियों और उद्यमियों के लिए डिजिटल रूप से कनेक्टेड और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंट की शक्ति से संपन्न बाजार का सृजन किया जा सकता है।

टेलीकॉम सेक्टर पर टैक्स का बोझ

भारती एयरटेल के प्रमुख सुनील भारती मित्तल ने कहा कि तंबाकू उद्योग की तरह देश में टेलीकॉम सेक्टर भी सर्वाधिक टैक्स के बोझ से दबा है। मित्तल ने कहा कि इस समस्या का समाधान बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नेशनल डिजिटल कम्यूनिकेशंस पॉलिसी (एनडीसीपी) भी पिछली टेलीकॉम पॉलिसी की तरह इस बात को स्वीकार करती है कि अधिक राजस्व जुटाना इस क्षेत्र का उद्देश्य नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस तरह तंबाकू उद्योग पर देश में टैक्स की ऊंची दरें लागू है, टेलीकॉम सेक्टर के साथ भी वही रवैया अपनाया जा रहा है।

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