मुंबई। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो चलाने वाली कंपनी इंटरग्लोब एविएशन में कई स्तरों पर फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है, जिसकी जांच सरकार करवाएगी। प्रमोटरों को इसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है।

सरकार इंटरग्लोब एविएशन के प्रमोटरों, राकेश गंगवाल व राहुल भाटिया के बीच शेयर होल्डिंग और एग्रीमेंट के बारे में जांच-पड़ताल करेगी। इसके अलावा बाजार नियामक सेबी अपने स्तर पर गंगवाल की तरफ से भाटिया पर लगाए गए आरोपों की सच्चाई पर करेगा।

सरकार की जांच में यदि किसी तरह की गड़बड़ी पाई गई तो कंपनी पर भाटिया के कुछ खास अधिकार रद्द किए जा सकते हैं। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक गंगवाल ने हाल ही में सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी।

इंटरग्लोबल एविएशन के शेयर होल्डर एग्रीमेंट में भाटिया को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। कंपनी के 6 डायरेक्टरों में से 3 को नियुक्त करना इसमें शामिल है। इसके अलावा चेयरमैन, सीईओ और अध्यक्ष को नॉमिनेट करना और नियुक्ति भी इसका हिस्सा है।

कंपनी में भाटिया की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत और गंगवाल की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत है। इस वजह से डायरेक्टरों की नियुक्ति के लिए गंगवाल और उनके सहयोगियों की जरूरत होती है। यहीं से विवाद शुरू हुआ। इस बारे में कंपनी की प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।

सेबी से गंगवाल की मांग

किसी भी कंपनी के प्रमोटरों के बीच अनबन की स्थिति में सेबी और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत कंपनी रजिस्ट्रार जैसे नियामकीय प्राधिकारणों को हस्तक्षेप करना पड़ता है। गंगवाल ने सेबी को लिखी एक चिट्ठी में कहा है कि नवंबर में शेयर होल्डर डील खत्म होने के बाद वह अपने विशेषाधिकार बनाए रखना चाहते हैं। इस लिहाज से क्लॉज (धारा) में संशोधन का निर्देश दें।

बर्ड को भाटिया की चिट्ठी

भाटिय ने पिछले महीने कंपनी के बोर्ड को लिखी चिट्ठी में कहा था कि गंगवाल ग्रुप शेयर होल्डिंग के एग्रीमेंट और कंपनी के 'ऑर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' के तहत अपने दायित्वों से खुद को भारमुक्त (रिलीव) करना चाहता है, जो इंटरग्लोब ग्रुप के नियंत्रित अधिकारों को लागू करता है। यही चिट्ठी 9 जुलाई को स्टॉक एक्सचेज के साथ शेयर की गई। गंगवाल की तरफ से लगाए गए अरोपों को भाटिया ने खारिज कर दिया है।

क्या कहता है कानून?

कॉरपोरेट कानून के मुताबिक गवर्नेंस और शेयर होल्डिंग, अलग-अलग मसले हैं। यदि कोई शेयरधारक कंपनी में गवर्नेंस से संबंधित चिंता उठाता है, तो सरकार या नियामक कंपनी से जवाब तलब कर सकते हैं। हालांकि शेयरहोल्डर एग्रीमेंट को लेकर विवाद निपटाने के लिए शेयरधारक को उचित न्यायिक मंच पर जाना होगा। कंपनी अधिनियम के तहत खराब प्रबंधन और उत्पीड़न से संबंधित विवादों का निपटारा एनसीएलटी में किया जा सकता है।

Posted By: Nai Dunia News Network