सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आपको कोई निवेश क्यों चुनना चाहिए? कुछ खरीदने के लिए हमारे दिमाग में दो तरह की सोच चलती हैः

1. हमें किसी चीज की जरूरत होती है और वह जरूरत पूरी करने की इच्छा हमें खरीद के लिए प्रेरित करती है। इसमें परिवार के सदस्यों की भी भूमिका हो सकती है।

2. हम कुछ देखते हैं और उसे खरीदने के समर्थन में तरह-तरह की बातें हमारे दिमाग में आनी शुरू होती हैं। किसी खरीदारी के ज्यादातर निर्णय इसी का नतीजा होते हैं।

लेकिन...

निवेश के फैसले इस तरीके से नहीं होने चाहिए। इस मामले में विवेक की बड़ी भूमिका होती है। इस मामले में बाहरी कारण हावी होने की गुंजाइश नहीं छोड़ी जा सकती। निवेश आप कर रहे हैं, जरूरतें आपकी है तो जाहिर है, फैसले का आधार भी आपके निजी होने चाहिए।

टीवी खरीदने जैसा मामला नहीं

मान लीजिए कि आप एक टीवी खरीदने की जरूरत महसूस कर रहे हैं, क्योंकि आपको टीवी पर आने वाले मनोरंजक और जानकारी वाले कार्यक्रम देखने हैं। एक बार आपने सोच लिया कि आपको टीवी खरीदना चाहिए तो फिर आपके दिमाग में इसके लिए माहौल बनना शुरू हो जाएगा।

यह कुछ ऐसे होगा

पहला उदाहरणः 32 इंच? 42 इंच ठीक रहेगी। नहीं, 56 इंच वाली ज्यादा अच्छी रहेगी। एचडी तो आम है, कम से कम 4के तो होनी ही चाहिए। खैर, स्मार्ट टीवी तो लेनी ही है। यह इतनी स्मार्ट तो होनी चाहिए कि मेरे कमांड्‌स पर काम कर सके और इंटरनेट पर टेडा ट्रांसफर कर सके।

दूसरा उदाहरणः टीवी खरीदने की सोच दूसरी तरह से भी शुरू हो सकती है। मान लीजिए कि आपके पास पहले से एक टीवी है, लेकिन विज्ञापन आपको नई टीवी लेने के लिए प्रेरित करते हैं। आपको लगता है कि अब स्मार्ट टीवी खरीदना चाहिए। एक बार नया टीवी खरीदने की बात दिमाग में आते ही पुरानी टीवी बदल देने के ढेरों तर्क आपके दिमाग में आने लगते हैं।

Posted By: Navodit Saktawat