हर निवेश का एक मकसद होता है। निवेशक भविष्य की जरूरतें पूरी करने के लिए बचत के पैसे ऐसी जगह लगाना चाहते हैं, जहां से उन्हें इतनी आय हो कि लक्ष्य साधे जा सकें। इसकी सटीक प्लानिंग होनी चाहिए।

धीरेंद्र कुमार

सीईओ, वैल्यू रिसर्च

निवेश का चयन करते समय प्रायः निवेशक बाहरी चीजों से प्रभावित होकर फैसले करते हैं। इसमें सेल्सपर्सन की सलाह या विज्ञापन भी अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन, इस आधार पर निर्णय लेना सही नहीं है। निवेश किसी भी चीजके प्रभाव में आकर नहीं किया जाना चाहिए। निवेशक को अपनी जरूरतों के हिसाब से सभी विकल्प खंगालने चाहिए और एक ठोस योजना के साथ चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ना चाहिए। विज्ञापन के प्रभाव में आकर किया गया निवेश आपकी नहीं, किसी दूसरे की जरूरतें पूरी करता है।

जरा सोचिए क्या आप कभी ऐसे घर में रहे हैं, जो बिना किसी नक्शे या पूर्व योजना के बनाया गया हो? देश के छोटे शहरों में इस तरह के घर आम हुआ करते थे और शायद आज भी हैं। ऐसे मामलों में होता यह है कि कोई व्यक्ति प्लॉट खरीदता है और दिहाड़ी मजदूरों को लेकर घर बनाने का काम शुरू करवा देता है। इसके लिए कोई नक्शा या प्लान बनाने की जगह वह खुद ही निर्देश देता रहता है। वह राज मिस्त्री को बताता है कि एक कमरा यहां होगा, एक वहां होना चाहिए, बाथरूम फलां जगह बन सकता है। जब घर आधा बन जाता है, तब उसके दिमाग में एक और बाथरूम की योजना आ सकती है, जिसे वह कहीं फिट करने की बात कहता है। मकान का मालिक इस तरह की दूसरी चीजों की इच्छा भी जता सकता है। वह छत पर जाने के लिए सीढ़ियों की जगह खोजता है, या बाथरूम के लिए वेंटीलेटर कीमांग कर सकता है। गेट चौड़ा करने के बारे में सोच सकता है, क्योंकि हो सकता है कि भविष्य में कोई कार खरीदी जाए। वह ऊंची सीढ़ियों की मांग कर सकता है या कह सकता है कि बाकी दीवारों के मुकाबले एक दीवार पतली होगी। इसी तरह के कई विचार उसके दिमाग में आते रहते हैं।

हो सकता है कि ऐसे घर अब भी बनते हों या नहीं भी बनते हों। हमने इनका जिक्र इसलिए किया, क्योंकि निवेश पोर्टफोलियो इस तरह के घरों से काफी मिलते-जुलते हैं। ज्यादातर मामलों में निवेश इस तरह से चुने जाते हैं, जिनको पोर्टफोलियो का दर्जा देना भी मुश्किल होता है। खैर घर के मामले में अच्छी बात यह होती है कि मकान कैसा भी बन जाए, आखिर में मालिक के काम तो आ ही जाता है, लेकिन निवेश के मामले में भी ऐसा ही हो, यह जरूरी नहीं है। अक्सर पोर्टफोलियो अलग-अलग समय पर जोश में आकर की गई खरीद और सेल्सपर्सन से मिली प्रेरणा का नतीजा होता है।

निवेश में गड़बड़ियों के लिए सेल्सपर्सन को दोष देना भी उचित नहीं होगा। कारण यह है कि उसका मुख्य काम अपनी कंपनी के लिए पैसे कमाना होता है, जबकि हमारा निवेश हमारी जिम्मेदारी होतीहै।

Posted By: Navodit Saktawat