नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आइओसी) अमेरिकी डॉलर बांड जारी करके तीन अरब डॉलर (21,000 करोड़ रुपये) से ज्यादा धनराशि जुटा सकती है। आइओसी के चेयरमैन संजीव सिंह ने बताया कि रुपये में गिरावट को थामने के लिए रिजर्व बैंक ने सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को विदेशी कर्ज लेने की अनुमति दी है। बांड जारी करके 90 करोड़ डॉलर जुटाने के लिए आइओसी पहले ही बाजार में उतर चुकी है।

वह अपनी वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए इतनी ही धनराशि सिंडीकेटेड लोन के रूप में जुटा रही है। उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि हम और ज्यादा विदेशी कर्ज लेने का प्रयास करेंगे। आरबीआइ द्वारा तय सीमा के भीतर कर्ज लिया जाएगा। पिछले साल अक्टूबर में आरबीआइ ने आइओसी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम को 10 अरब डॉलर विदेशी कर्ज लेने की अनुमति देते हुए बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के नियम आसान किए थे, ताकि वे अपनी वर्किंग कैपिटल की आवश्यकताएं पूरी कर सकें।

रिजर्व बैंक ने इन कंपनियों के लिए अलग-अलग उधारी की सीमा खत्म कर दी थी। उस समय वे अधिकतम 75 करोड़ डॉलर तक कर्ज ले सकती हैं। कच्चे तेल की घरेलू आवश्यकता पूरी करने के लिए देश की आयात पर निर्भरता काफी ज्यादा है। इस वजह से तेल कंपनियों को आयात के लिए काफी विदेशी मुद्रा की आवश्यकता होती है। इनकी मांग ज्यादा होने पर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आने लगती है। विदेशी कर्ज लेने से घरेलू मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग कम होगी तो रुपये में गिरावट पर अंकुश लगाया जा सकेगा।

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