नई दिल्ली। जेट एयरवेज के कर्ज का पुनर्गठन होने और एतिहाद एयरवेज तथा नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआइआइएफ) की ओर से निवेश होने से घाटे में चल रही कंपनी को करीब 3,400 करोड़ रुपये का नया फंड मिल सकता है।

सूत्रों के मुताबिक इस प्रक्रिया में कंपनी में संस्थापक नरेश गोयल की हिस्सेदारी वर्तमान 51 फीसद से घटकर 20 फीसद पर आ जाएगी। कर्ज पुनर्गठन की शर्तों पर अभी बात चल रही है। सूत्रों ने कहा कि अबुधाबी की एतिहाद एयरवेज कंपनी में करीब 1,400 करोड़ रुपये का निवेश कर सकती है।

एतिहाद की पहले से जेट एयरवेज में 24 फीसद हिस्सेदारी है। जेट एयरवेज के बोर्ड ने 14 फरवरी को बैंक के प्रोविजनल रिजॉल्यूशन प्लान (बीएलपीआरपी) को मंजूरी दी थी, जिसके तहत कर्जदाता समूह कंपनी में सबसे बड़े हिस्सेदार बन जाएंगे। इस प्लान पर गुरुवार को होने वाली बैठक में शेयरधारकों से मंजूरी ली जानी है।

शेयरधारकों की मंजूरी के बाद कर्ज के एक हिस्से को 11.4 करोड़ शेयरों में परिवर्तित कर दिया जाएगा। सूत्रों ने कहा कि सरकार समर्थित एनआइआइएफ जेट एयरवेज में 19 फीसद से कुछ अधिक हिस्सेदारी ले सकता है। योजना के मुताबिक एनआइआइएफ कंपनी में 1,400 करोड़ रुपये का निवेश कर सकता है और कर्जदाता अपने कर्ज को करीब 600 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों में परिवर्तित कर सकते हैं।

इस तरह से जेट एयरवेज को कुल 3,400 करोड़ रुपये का नया फंड मिल सकता है। इस योजना के तहत हालाांकि कंपनी के संस्थापक नरेश गोयल की हिस्सेदारी वर्तमान 51 फीसद से घटकर 20 फीसद पर आ जाएगी। इस बारे में पुष्टि के लिए एतिहाद एयरवेज और एनआइआइएफ से पूछे गए सवालों के जवाब नहीं मिले।

नरेश गोयल की हिस्सेदारी घटने के मुद्दे पर जेट एयरवेज को भेजे गए सवालों के भी तत्काल जवाब नहीं मिल सके। गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2018) में जेट एयरवेज ने 732 करोड़ रुपये का समेकित घाटा दर्ज किया था।