नई दिल्ली। जेट एयरवेज इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही है। गंभीर वित्तीय संकट की वजह से कंपनी की ज्यादातर उड़ाने रद्द हो चुकी हैं, वहीं तनख्वाह ना मिलने से पायलट हड़ताल कर चुके हैं। इस बीच जेट एयरवेज को संकट से उबारने के लिए हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया सोमवार को शुरू हो गई है।

कंपनी को कर्ज देने वाले बैंक समूह में सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक ने सोमवार को जेट को खरीदने में दिलचस्पी रखने वाली कंपनियों से रणनीतिक एवं वित्तीय निविदाएं मांगी हैं। इसमें जेट एयरवेज की 75 प्रतिशत तक इक्विटी बिक्री का प्रस्ताव दिया गया है।

बोली लगाने वाली कंपनियों को बुधवार को कार्यालय बंद होने की अवधि से पहले तक निविदाएं अपनी जमा कराने को कहा गया है। जेट एयरवेज का सबसे बड़ा कर्जदाता होने की वजह से उसे संकट से निकालने और नया प्रमोटर चुनने की जिम्मेदारी एसबीआई को मिली है। बैंक ने निविदा प्रक्रिया के संचालन और निगरानी का दायित्व एसबीआइ कैपिटल मार्केट्स को सौंपा है।

जेट एयरवेज की कर्ज समाधान योजना के तहत इस साल 25 मार्च को कंपनी के संस्थापक और प्रमोटर नरेश गोयल तथा उनकी पत्नी अनिता गोयल निदेशक बोर्ड से इस्तीफा दे चुके हैं। असल में कर्जदाता बैंकों ने गोयल दंपती को निदेशक बोर्ड से हटाने और एयरलाइन की बहुसंख्य हिस्सेदारी पर नियंत्रण की शर्त पर ही 1,500 करोड़ रुपये के निवेश का फैसला किया था।

उसके बाद गोयल की जेट एयरवेज में हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 25 फीसदी रह गई है। बाकी 75 फीसदी हिस्सेदारी में से करीब 51 फीसदी कर्जदाता बैंकों, 12 फीसदी एतिहाद एयरवेज और शेष आम शेयरधारकों के पास हैं।

बैंकों के समूह ने जेट एयरवेज के न्यूनतम 3.54 करोड़ शेयर (31.2 फीसद हिस्सेदारी) तथा अधिकतम 8.51 करोड़ शेयर (75 फीसद हिस्सेदारी) बेचने का प्रस्ताव रखा है। एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआइ) का पूरा खर्च बोली लगाने वालों को उठाना होगा। बैंक इस तरह की किसी लागत को वहन करने के लिए किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं होंगे।

विज्ञापन में कहा गया है कि निवेशक रणनीतिक (एयरलाइन उद्योग का अनुभव रखने वाली कंपनी) अथवा वित्तीय (वित्तीय संस्थान, प्राइवेट इक्विटी फंड, इंवेस्टमेंट फंड आदि) किसी भी प्रकार के हो सकते हैं। रणनीतिक बोलीदाता के पास पिछले फाइनेंशियल ईयर में कम से कम 1,000 करोड़ की पूंजी होनी जरूरी है।

वित्तीय निवेशक के पास कमर्शियल एविएशन व्यवसाय का कम से कम 3 साल का अनुभव होना चाहिए। यदि बोलीदाता एक कंपनी न होकर कंपनियों का समूह है तो इसमें तीन से ज्यादा कंपनियां नहीं होनी चाहिए। साथ ही किसी भी कंपनी की हिस्सेदारी 15 फीसदी से कम नहीं होनी चाहिए। समूह का एक लीड मैनेजर होना भी जरूरी है।

पिछले सप्ताह बैंकों ने स्पष्ट किया था कि मौजूदा कानूनी और नियामक व्यवस्था के अंतर्गत वे जेट एयरवेज के निवेशक के चयन को निश्चित समय सीमा में पूरा करने की कोशिश करेंगे। लेकिन इन कोशिशों का परिणाम निवेशकों द्वारा दिखाई गई रुचि पर निर्भर करेगा।

जेट एयरवेज ने एसबीआई समेत विभिन्न भारतीय बैंकों से 8,000 करोड़ रुपए का कर्ज ले रखा हैं। लेकिन इसका ब्याज अदा न कर पाने के कारण एयरलाइन की स्थिति बेहद खराब हो गई है। भयंकर वित्तीय संकट के चलते जेट एयरवेज को अपने ज्यादातर विमान खड़े करने को मजबूर होना पड़ा है।

इसके अलावा पायलटों, इंजीनियरों और वरिष्ठ अधिकारियों को समय से वेतन नहीं मिल पाने से रोजाना दर्जनों उड़ाने रद्द करनी पड़ रही हैं।