आरबीआई के पास 3.6 खरब रुपए के अधिशेष फंड के उलट अध्ययन रिपोर्ट

केंद्रीय बैंकों में पूंजी और संपत्ति का औसत अनुपात

- वैश्विक पैमाने पर 6.56 प्रतिशत

- उभरती अर्थव्यवस्थाओं में 6.96

- भारतीय रिजर्व बैंक में 6.6 प्रतिशत

मुंबई। एजेंसी

रिजर्व बैंक को परिचालन घाटे के कारण अपनी स्वायत्तता से समझौता करते हुए सरकार से वित्तीय सहायता लेने की जरूरत पड़ सकती है। मुंबई स्थित 'सेंटर फॉर एडवांस्ड फाइनेंशियल रिसर्च एंड लर्निंग' के निदेशक अमृत्य लाहिरी और 'यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया' के एक प्रोफेसर के नेतृत्व में किए गए अध्ययन की रिपोर्ट में तो कम से कम ऐसा ही कहा गया है।

यह रिपोर्ट 45 देशों के केंद्रीय बैंकों की बैलेंस शीट के अध्ययन पर आधारित है। इसके मुताबिक वैश्विक पैमाने पर केंद्रीय बैंकों में पूंजी और संपत्ति का औसत अनुपात (शुद्घ पुनर्मूल्यांकन पूंजी) 6.56 प्रतिशत है। उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के मामले में यह अनुपात 6.96 प्रतिशत और भारतीय रिजर्व बैंक के मामले में 6.6 प्रतिशत है। इस अध्ययन के नतीजे आरबीआई की स्वायत्तता को लेकर बहस को नया मोड़ देते हैं। दिलचस्प है कि इसकी रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब एक विशेष समिति इस बात की समीक्षा कर रही है कि रिजर्व बैंक को अपने पास कितना फंड रखना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय मानकों का हवाला

रिपोर्ट के लेखकों ने इसे तैयार करने से पहले रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य, पूर्व गर्वनर रघुराम राजन और अन्य के साथ विचार-विमर्श किया है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'पूंजी और संपत्ति के औसत अनुपात के तुलनात्मक अध्यय से पता चलता है कि समग्र अंतरराष्ट्रीय मानाकों के हिसाब से रिजर्व बैंक के पास जरूरत से ज्यादा पूंजी नहीं है। वास्तव में आरबीआई के पास जरूरत से थोड़ी कम पूंजी है।'

केंद्रीय बैंक पर दबाव

पिछले साल आई एक अलग रिसर्च रिपोर्ट में अनुमान लगाया था कि रिजर्व बैंक के पास उसकी जरूरत के मुकाबले कम से कम 3.6 खरब रुपए का ज्यादा फंड है। केंद्रीय बैंक पर इस बात का दबाव बढ़ता जा रहा है कि उसे अपने रिजर्व का एक हिस्सा सरकार को दे देना चाहिए, ताकि टैक्स से होने वाली आय घटने के कारण बढ़ते बजट घाटे से निपटने में मदद मिल सके। पिछले महीने रिजर्व बैंक के गवर्नर पद से उर्जित पटेल के इस्तीफे की सबसे बड़ी वजह इसी दबाव को माना जा रहा है।

थिंक टैंक की दलील

रिजर्व बैंक की तरफ से गठित एक थिंक टैंक की अध्ययन रिपोर्ट में दलील दी गई है कि ऐसे समय में, जब भारत अत्यधिक राजकोषीय घाटे का सामना कर रहा है, परिचालन स्वायत्तता बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक के पास जोरदार पूंजी का सपोर्ट होना चाहिए। लेकिन, उन्होंने यह भी लिखा, 'केंद्रीय बैंकों को अपनी-अपनी बैलेंस शीट में भारी-भरकम पूंजी रखने की जरूरत क्यों नहीं है, इसके पक्ष में दलील यह है कि सरकार, जो उनका मालिक है भी है, आपात स्थिति में उन्हें पूंजी और संसाधन उपलब्ध करा सकती है।'