मुंबई। रिजर्व बैंक ने गुरुवार को बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए उम्मीद के विपरीत नीतिगत ब्याज दरों में कटौती नहीं की। दूसरी तरफ वित्त वर्ष 2019-20 के लिए देश की आर्थिक विकास दर का अनुमान एक प्रतिशत घटाकर 5 प्रतिशत कर दी। महज दो महीने पहले केंद्रीय बैंक ने अनुमान लगाया था कि चालू वित्त वर्ष में विकास दर 6 प्रतिशत से ऊपर रहेगी। असल में महंगाई केवल प्याज की नहीं बढ़ रही है जिसका ज्यादा इस्तेमाल आम आदमी करता है, बल्कि देश में दूध से लेकर पेट्रोल-डीजल तक सभी चीजें महंगी हो रही हैं। इसका असर अब सभी तबके पर हो रहा है। बैंकों के लोन और सस्ते होने की उम्मीद पर पानी फिर गया है।

मौद्रिक नीति की समिति (एमपीसी) की बैठक के फैसलों की घोषणा करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि रेपो रेट को 5.15 फीसदी पर बरकरार रखा गया है। रिवर्स रेपो रेट भी 4.90 फीसदी के स्तर पर बनी रहेगी। इसके अलावा नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) 4 फीसदी और एसएलआर 18.5 फीसदी पर बनाए रखा गया है। आरबीआई ने इससे पहले लगातार 5 बार नीतिगत दरों में कटौती की थी।

लेकिन उम्मीद बाकी

एमपीसी के सभी छह सदस्य ब्याज दरों में कटौती न करने के पक्ष में रहे। एमपीसी ने पॉलिसी का अकोमोडेटिव रुख बरकरार रखा है। यानी आगे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बनी हुई है। समिति की अगली बैठक 4-6 फरवरी, 2020 को होगी।

विकास दर घटने की आशंका

रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर को लेकर अनुमान 6.1 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर में अनुमान लगाया था कि जीडीपी वृद्धि दर 6.9 से घटकर 6.1 फीसदी रह जाएगी, जबकि अगस्त में 6.9 प्रतिशत विकास दर का अनुमान लगाया था। आरबीआई के मुताबिक धीमी आर्थिक विकास का सबसे बड़ा कारण घरेलू मांग में कमी है।

बढ़ सकती है महंगाई

आरबीआई के मुताबिक छोटी अवधि में महंगाई बढ़ सकती है। केंद्रीय बैंक ने इस साल अक्टूबर से लेकर अगले साल मार्च तक के लिए खुदरा कीमतों के हिसाब से महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 4.7-5.1 फीसदी कर दिया है। वैसे इसके बाद यानी अप्रैल-सितंबर, 2020 के लिए महंगाई का लक्ष्य 3-4 फीसदी रखा है।

शक्तिकांत दास की टिप्पणियां

- अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत नजर आ रहे हैं।

- अक्टूबर तक सर्विस सेक्टर की ग्रोथ सुस्त रही है।

- तीन दिसंबर तक 45,170 करोड़ डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार।

- रबी की बुवाई में थोड़ा सुधार नजर आया है।

- अक्टूबर में गैर-तेल निर्यात में सुधार हुआ और नवंबर में पर्यटकों की संख्या बढ़ी

- सरकारी खर्च बढ़ने से अर्थव्यवस्था को थोड़ी मदद मिली है।

- वित्त वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही तक बिजनेस सेंटीमेंट में सुस्ती बने रहने की आशंका।

- एक करोड़ डॉलर के डेरिवेटिव्स डील को बगैर एक्सपोजर मंजूरी।

Posted By: Yogendra Sharma

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