इंदौर। मध्यप्रदेश के साथ ही गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में मानसून की देरी और कमी के कारण दलहन पैदावार में 15 फीसदी तक नुकसान की आशंका जताई जा रही है। पिछले दो वषोर् से अधिक समय से सभी दलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे भाव पर होने से भी किसानों की बेरुखी इनसे बनने लगी है। किसान अब कम लागत और कम देखभाल वाली फसल पर ध्यान देने लगे हैं।

ऑल इण्डिया दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल के अनुसार मंडियों में दलहन की कीमतों में जिस तरह से पिछले दो वर्षों से अधिक समय से दबाव बना है उससे किसान अब उन फसलों की ओर रुख करने लगे हैं जिनमें लागत कम हो साथ ही देखभाल भी कम करना पड़े। उनके अनुसार केंद्र सरकार द्वारा वर्तमान में सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 399 रुपए से बढ़ाए जाने और इसके 3700 रुपए किए जाने से इसके प्रति मध्यप्रदेश के साथ ही महाराष्ट्र और राजस्थान में भी किसानों का आकर्षण बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। साथ ही दोबारा बोवनी की स्थिति में भी सोयाबीन को लाभ होगा।

मप्र के कई हिस्सों में इसकी वजह से जहां मूंग के बदले तिलहन फसल पर जोर दिया जा रहा है वहीं गुजरात के कई हिस्सों में उड़द की फसल प्रभावित होने के आसार हैं।

नेफेड के पास दलहन, तिलहन का भारी स्टॉक

नैफेड के पास रिकॉर्ड 40 लाख टन का दलहन, तिलहन का स्टॉक है। इसके अलावा केंद्र सरकार के पास दलहन का 15 लाख टन का बफर स्टॉक भी है। नेफेड के पास 25 लाख टनदलहन का और 15 लाख टन तिलहन का स्टॉक है। इसमें 20 लाख टन चना है। मूंग, उड़द, मसूर और तुअर का पांच लाख टन का स्टॉक है। तिलहन में सरसों का 11 लाख टन एवं अन्य का तिलहन का चार लाख टन का स्टॉक है।

Posted By: Arvind Dubey

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