देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआइएल) के मुखिया मुकेश अंबानी ने लगातार नौवें वर्ष सबसे अमीर भारतीय का रुतबा बरकरार रखा है। एशिया के अरबपतियों पर नजर रखने वाली हुरुन ने आइआइएफएल के सहयोग से यह सूची तैयार की, जिसे मंगलवार को जारी किया गया। इस सूची के मुताबिक पिछले एक वर्ष में मुकेश अंबानी की संपत्ति में 73 प्रतिशत का उछाल आया और वह 6.58 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 63 वर्षीय अंबानी इस वर्ष वैश्विक स्तर पर शीर्ष पांच धनकुबेरों में शामिल हैं। हुरुन की इस सूची के मुताबिक इस वर्ष 31 अगस्त को देश में 1,000 करोड़ रुपये या इससे अधिक नेटवर्थ वाले धनकुबेरों की संख्या 828 थी। हालांकि इनमें महिलाओं की संख्या महज 40 या पांच प्रतिशत से भी कम रही। सूची में सायरस मिस्त्री व शपूरजी पालोनजी मिस्त्री परिवार की संपत्ति में एक वर्ष के दौरान एक प्रतिशत के करीब गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के साथ नवीनतम सूची में दोनों की संपत्ति 76,000 करोड़ रुपये प्रत्येक बताई गई है।

हाल के दिनों में एयरपोर्ट कारोबार में बड़ी रुचि दिखाने वाले गौतम अडानी की संपत्ति में पिछले एक वर्ष के दौरान 48 प्रतिशत का उछाल आया। अडानी ग्रुप के मुखिया की संपत्ति इस बार 1.40 लाख करोड़ रुपये रही और वे सूची में चौथे स्थान पर रहे। वहीं, संपत्ति में 23 प्रतिशत गिरावट के बावजूद हिंदुजा बंधु 1.43 लाख करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर रही है। वहीं, एचसीएल के शिव नादर परिवार की संपत्ति 34 प्रतिशत बढ़कर 1.41 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई और यह परिवार तीसरे स्थान पर रहा है।

हुरुन सूची के मुताबिक विप्रो के अजीम प्रेमजी इस बार दो पायदान फिसलकर 1.14 लाख करोड़ रुपये के साथ पांचवें और सायरस पूनावाला 94,300 करोड़ रुपये नेटवर्थ के साथ छठे स्थान पर रहे। डी-मार्ट के राधाकिशन दमानी इस बार शीर्ष 10 भारतीय धनकुबेर में जगह बनाने में कामयाब रहे। उनकी संपत्ति 87,200 करोड़ रुपये बताई गई है। आइपीओ के जबर्दस्त प्रदर्शन के बूते हैपिएस्ट माइंड्स के मुखिया अशोक सूता इस वर्ष अरबपतियों की सूची में शामिल हुए हैं, जिनकी संपत्ति 3,700 करोड़ रुपये है। महिलाओं में गोदरेज की स्मिता कृष्णा 32,400 करोड़ रुपये के साथ सबसे आगे रही हैं। उनके बाद 31,600 करोड़ रुपये संपत्ति के साथ बायोकॉन की प्रमुख किरण मजुमदार-शॉ का स्थान है।

इस वर्ष अप्रैल के बाद से मुकेश अंबानी की संपत्ति में तेज उछाल आया है। इसकी मुख्य वजह यह है कि आरआइएल ने अपनी डिजिटल शाखा रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स और रिटेल शाखा रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (आरआरवीएल) की बड़ी हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों के हाथों बेची है।

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