नई दिल्ली। ईंधन का खुदरा कारोबार करने वाली सरकारी कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर एक रुपए प्रति लीटर मार्केटिंग मार्जिन छोड़ना बंद कर दिया है। सूत्रों ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आने की वजह से इसकी गुंजाइश बनी।

करीब दो महीने पहले आम जरूरत के ईंधन की कीमतें अत्यधिक बढ़ने के बाद सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के लिए मार्केटिंग मार्जिन में 1 रुपए प्रति लीटर की कटौती अनिवार्य कर दी थी। अक्टूबर, 2018 में केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क 1.50 रुपए प्रति लीटर घटाया था। इसके अलावा सरकारी कंपनियों को यह आदेश भी दिया गया था कि वे अपना-अपना मार्जिन 1 रुपए तक कम करें, ताकि ग्राहकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी के असर से कुछ राहत दिलाई जा सके।

मामले से सीधे तौर पर जुड़े सूत्रों ने बताया कि चूंकि हाल के हफ्तों में कच्चे तेल कीमतें घटी हैं, लिहाजा इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन जैसी सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां अपना-अपना मार्जिन पिछले स्तर पर बहाल करने में सक्षम हो गईं। वित्त मंत्रालय के दो अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि अक्टूबर में इन कंपनियों से कहा गया था कि यदि कच्चे तेल की कीमतें घटती हैं तो वे धीरे-धीरे मार्जिन में कटौती रिकवर कर लें। एक अधिकारी ने कहा, 'अब जबकि तेल की कीमतें घटी हैं, वे अपने-अपने नुकसान की भरपाई कर सकती हैं।'

उपभोक्ताओं पर असर

मार्केटिंग मार्जिन पुराने स्तर पर बहाल होने का यह मतलब हुआ कि पेट्रोलियम कंपनियां कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं देंगी। अब वे अपने-अपने पिछले घाटे की भरपाई करेंगी। इसका असर दिखने भी लगा है, पेट्रोल और डीजल की कीमतें उसी अनुपात में नहीं घट रही हैं, जितनी गिरावट कच्चे तेल की कीमतों में आ रही है।

1 अक्टूबर, 2018 से अब तक ब्रेंट कू्रड (कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रांड), सिंगापुर गैसोलीन और अरब गल्फ डीजल की कीमतों में 37 से लेकर 40 प्रतिशत तक गिरावट आ चुकी है। दूसरी तरफ भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें करीब 17-18 प्रतिशत ही घटी हैं।

मार्च तक फुल रिकवरी

एक अधिकारी ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बाद मार्केटिंग मार्जिन में कटौती से सरकारी तेल कंपनियों को जो नुकसान हुआ है, उसकी पूरी भरपाई होने में इस साल मार्च के अंत तक का वक्त लग सकता है। चूंकि यह मामला काफी संवेदनशील है, लिहाजा सूत्रों ने पहचान जाहिर करने से मना कर दिया।