भारत में जल्द ही एक स्टार्टअप शुरू होगा जिसका उद्देश्य बुजुर्ग नागरिकों के अकेलेपन को कम करना है। इस प्रयोग के पीछे काम कर रहे हैं शांतनु नायडू, जो कि बिजनेस हस्‍ती रतन टाटा के सहायक हैं। इसका नाम होगा गुडफेलो। इसे लॉन्च करने का मकसद युवाओं को उनके दैनिक जीवन में बुजुर्गों की सहायता करने के लिए भर्ती करना भी है। गुडफेलो एक लाभकारी स्टार्टअप है जो दो पीढि़यों के बीच दोस्ती की शुरुआत करेगा। यह अकेलेपन को कम करने के लिए 30 साल की उम्र तक युवा, शिक्षित स्नातकों को नियुक्त भी करेगा। नायडु ने कहा, इस स्टार्टअप को टाटा समूह के पूर्व अध्यक्ष का समर्थन प्राप्त है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वह उद्यम में कितना पैसा लगा रहे हैं। दूसरी तरफ, रतन टाटा ने कहा कि मैं यह देखने के लिए उत्सुक हूं कि गुडफेलो कैसे आगे बढ़ता है और शांतनु और उनकी युवा टीम को शुभकामनाएं देता हूं। नायडू ने कहा, "वे कागजी कार्रवाई और ई-मेल के साथ बुजुर्गों की मदद करेंगे, या दादा-दादी के साथ समय बिताएंगे। चाहे वह सैर पर जाना हो, फिल्में देखना हो, किराने की खरीदारी में मदद करना हो, डॉक्टर के पास जाना हो, सभी तरह की उपयोगी जरूरतों जैसे कि शिक्षण तकनीक, कागजी कार्रवाई और ईमेल में मदद करना, या सिर्फ अपने दादा-दादी के साथ समय बिताना, हर काम में यह स्‍टार्ट अप मददगार साबित होगा।

आंकड़े कहते हैं देश में ढाई करोड़ बुजुर्ग

गैर सरकारी संगठनों के अनुसार, भारत में लगभग 2.5 करोड़ बुजुर्ग स्वतंत्र रूप से रहते हैं। पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, बुजुर्गों के साथ काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों ने कहा कि बहुत से वरिष्ठ नागरिक विशेष रूप से अकेले रहने वाले लोग कोविड -19 की शुरुआत के बाद से अवसाद, चिंता की भावना से जूझ रहे हैं और दूसरी लहर के दौरान स्थिति और खराब हो गई है।

Posted By: Navodit Saktawat