नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि एक अप्रैल से शुरू हो रहे वित्त वर्ष 2020-21 में सरकार राजकोषीय लक्ष्य हासिल कर लेगी। इस मामले में संदेह करने की कोई वजह नहीं है।

दास ने एक इंटरव्यू में कहा कि सरकार अगले वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटा कम करके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.5 प्रतिशत के स्तर पर लाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि सरकार अब भी बजट घाटे को लेकर राजकोषीय दायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) समिति की तरफ से तय सीमा के भीतर है।

दास की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार तीसरे साल बजट में तय लक्ष्य हासिल करने में विफल रही हैं। मौजूदा वित्त वर्ष यानी 2019-20 में राजकोषीय घाटा 3.3 प्रतिशत के स्तर पर सीमित रखने का लक्ष्य था, जो बढ़कर 3.8 प्रतिशत पर पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2020-21 में राजकोषीय घाटा 3.5 प्रतिशत के स्तर पर सीमित रखने का लक्ष्य तय किया गया है।

दास ने कहा कि अगले वित्त वर्ष का बजट महज एक पखवाड़ा पहले संसद में पेश किया गया है और इसके लक्ष्यों और आंकड़ों पर संदेह करने की कोई वजह नहीं है। रेटिंग एजेंसियों ने भी बजट के आंकड़ों पर भरोसा जताया है। इस महीने की शुरुआत में फिच रेटिंग्स ने कहा था कि बजट घाटे में 10 प्रतिशत की मामूली वृद्घि और राजस्व में 9.2 प्रतिशत इजाफे का बजट अनुमान मोटे तौर पर विश्वसनीय हैं। हालांकि, इन मामलों में लक्ष्य न हासिल हो पाने का जोखिम बना रहेगा।

राजकोषीय घाटे का मतलब

सरकार की आय और खर्च का अंतर राजकोषीय घाटा कहलाता है। इसका सीधा मतलब होता है कि सरकार अपने संसाधनों से अधिक खर्च कर रही है। हालांकि कई बार अर्थव्यवस्था की सुस्ती दूर करने के लिए नीतिगत तौर पर जानबूझकर ऐसा किया जाता है।

छोटी बचत से होगी भरपाई

रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा, 'जहां तक सरकार के राजकोषीय प्रबंधन का सवाल है, सरकार एफआरबीएम की सिफारिशों के दायरे में बनी हुई है। इस लिहाज से अतिरिक्त राजकोषीय घाटा 0.5 प्रतिशत तक सीमित रखा गया है। सरकार इस सीमा से बंधी हुई है और अगले साल के राजकोषीय घाटे की भरपाई का एक बड़ा हिस्सा छोटी बचत से आएगा।'

एफआरबीएम की सिफारिश

एनके सिंह की अध्यक्षता वाली एफआरबीएम कमेटी ने वित्त वर्ष 2020-21 में राजकोषीय घाटा कम करके 2.8 प्रतिशत पर और वित्त वर्ष 2022-23 तक इसे 2.5 प्रतिशत के स्तर लाने की सिफारिश की थी। समिति ने राष्ट्रीय सुरक्षा, युद्घ की स्थिति, राष्ट्रीय स्तर की विपत्ति और कृषि क्षेत्र का उत्पादन एवं आय प्रभावित होने की स्थिति से निपटने के लिए एक विशेष उपबंध का भी सुझाव दिया है। इसके तहत राजकोषीय घाटा तय लक्ष्य से ऊपर जा सकता है, लेकिन एक वित्त वर्ष में 0.5 प्रतिशत से अधिक नहीं।

Posted By: Nai Dunia News Network